कहते हैं युवान मुझे

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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कहते हैं युवान मुझे,देश की जान मुझे।
सपनों का समुन्दर मुझमें उम्मीदों का अम्बर मुझमें॥
आने वाली सदी मेरी,देश की प्रगति मेरी।
फिर भी हताश हूं इतना उदास हूं॥
 कांटों भरा ताज है लंबी-सी कतार है।
मेरे आगे सौ और पीछे हजार है॥
प्रतियोगिता की पराकाष्ठा को सहता हूं।
फिर भी हर बार परीक्षा में बैठता हूं॥
रातों  की नींद से मेरा वादा झूठा हो गया।
ख्वाइशें अधूरी रही उम्मीद से नाता टूट गया॥
डिग्रियां मेरी मुझे कांटों-सी चुभती है।
अयोग्यता के आगे योग्यता झुकती है॥
जाति-धर्म देखकर किस्मत आजमाई जाती है।
बंद करो कहना कि किस्मत आसमां में लिखी जाती है॥
परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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