काश! हौंसलों को पंख लगने देते ..

सरिता तिवारी
गोंडा ( उत्तर प्रदेश)
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एक आइना मेरे हाथों में,
देकर संवरने के लिए।
बस उसी आइने में,
उलझा दिया मुझे॥
कुछ लोग मिले ऐसे,
जीवन के सफर में।
बस उन्हीं की बातों में,
सिमट कर रह गई॥
जब भी कुछ कर गुजरने की,
बात मन में आई।
नाजुक-सी कली कहकर,
बहला दिया मुझे॥
कोई दूसरा जो कहता,
लड़ लेती उससे मैं।
अपनों से लड़कर जीतना,
मुश्किल था मेरे लिए॥
करती भी कैसे हिम्मत ??
लड़ने की समाज से।
अपनों के ही सवालों के ??
कटघरे में खड़ी थी॥
अभी मेरे हौंसलों को,
पंख भी न लगे थे।
कि सात फेरों में,
उलझा दिया मुझे॥
कुल मर्यादा का पाठ पढ़ाकर,
संस्कार का सबक सिखाकर।
मेरे अरमानों को घूँघट के नीचे,
दफ़ना दिया गया…॥
परिचय-सरिता तिवारी का निवास और स्थाई पता आजाद नगर(चिरेबसना)पोस्ट-डिडसिया कला बेलसर गोंडा (उत्तरप्रदेश) हैl आपकी जन्म तिथि १ जनवरी १९८० तथा जन्म स्थान-अतरौलिया जरवल रोड(गोंडा)हैl सामाजिक गतिविधि के तहत आप शैक्षिक एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्रतिभागी होकर सबको जागरूक करती हैंl आपकी लेखन विधा-कविता,कहानी है,जबकि प्रेरणा पुंज-सामाजिक समस्याएँ हैंl इनकी रचनाओं का प्रकाशन-प्रसारण समाचार पोर्टल तथा चैनल पर भी हुआ हैl आप पेशे से जिला अस्पताल(गोंडा) में परामर्शदात्री के रूप में कार्यरत हैंl सरिता तिवारी ने समाजशास्त्र विषय में फैजाबाद से स्नातकोत्तर किया हैl आपकी अभिरुचि-गीत,कविता की रचना,लेखन तथा संगीत में हैl सम्मान के रूप में आपको `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान में योगदान के लिए एवं शैक्षिक विकास के लिए भी सम्मानित किया गया हैl सरिता जी की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना हैl

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