कीजिए श्रम का सम्मान

अजय जैन ‘विकल्प
इंदौर(मध्यप्रदेश)
विशेष वरिष्ठ संवाददाता-(दैनिक स्वदेश समाचार-पत्र, इंदौर)
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श्रमिक दिवस विशेष……………………….

हर कोई किसी न किसी रूप में श्रमिक ही है,भले ही आप इसे नहीं मानिए,पर यह बात सच है। दरअसल हमारे पास श्रम के अतिरिक्त कोई वास्तविक सम्पत्ति नहीं है। यह कहा जाए कि,श्रम ही जीवन है तो गलत नहीं होगा। आप कभी भी जीवन में श्रम की अनिवार्यता को कम मत आंकिए और इसीलिए हर मजदूर या सेवा कार्य करने वाले मनुष्य की प्रशंसा भी कीजिए। याद कीजिए कि,गीता में भगवान श्री कृष्ण ने भी कर्म करने पर ही बल दिया है,जो कि श्रम ही है। वैसे भी जब हमने मानव देह को पाया है तो श्रम का कर्म करना ही चाहिए और पड़ेगा भी।

आज आप सारे संसार में जो भी बड़े-बड़े नगर,गगनचुंबी भवन,हवाई जहाज,रेलगाड़ियाँ,सभी तरह के वाहन या अन्य कई प्रकार के विशाल कारखाने,टी.वी. तथा सिनेमा आदि भी देख रहे हैं अथवा उपयोग करते हैं तो यह सभी मनुष्य के पुरुषार्थ का ही फल है,इसलिए किसी भी प्रकार के श्रम से पीछे मत हटिए,क्योंकि इसी से आपकी प्रतिष्ठा आएगी।

यदि हम कर्म यानी श्रम को देखें तो श्रम दो प्रकार का होता है-शारीरिक तथा मानसिक। किसी वस्तु,अर्थ (धन) या उद्देश्य की प्राप्ति के लिए किया गया `प्रयत्न` श्रम माना जाएगा,जो कि एक लक्ष्य भी है। इसी से श्रम करने वाले व्यक्ति को उन्नति की राह मिलती है। इसी प्रकार किसी लक्ष्य जैसे अभियंता या अधिकारी बनना और किसी खास परीक्षा में उत्तीर्ण होना,मानसिक श्रम है।

श्रम को लेकर कछुए और खरगोश की कहानी तो आपने सुनी ही होगी,-खरगोश तेज गति से चलता है और अपने तेज चलने पर बहुत गर्व करता है। इधर कछुआ बहुत धीमी गति से चलता है,लेकिन सबको आश्चर्य में डाल देता है। जब दोनों की दौड़ होती है तो कछुआ लगातार चलता रहता है,पर खरगोश अहम में सो जाता है। ऐसे में कछुआ गंतव्य पर पहले पहुँच जाता है,किन्तु खरगोश आलस्य की वजह से पिछड़ जाता है। बात केवल इतनी-सी है कि,जो किसी भी तरह का काम,यानि मजदूरी या श्रम करता है,जीत उसे देर-सबेर मिलती ही है।

इस बारे में सेमुअल जॉनसन ने कहा है-`जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता पूरे जन्म के श्रम द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। इससे कम मूल्य पर इसको खरीदा ही नहीं जा सकता है।`

यूं भी देखा जाए तो श्रम हर मनुष्य जाति तथा राष्ट्र की उन्नति के लिए अनिवार्य ही है,क्योंकि हमारे परिश्रम से ही देश,समाज और परिवार की उन्नति होगी। याद रखिए कि,कोई भी एक ही दिन में बिरला और टाटा नहीं बन जाता है,आपको इसके लिए निरन्तर मेहनत करनी होगी,भले ही वो शारीरिक हो या मानसिक। इसके बाद ही आपका नाम किसी की जुबान पर एक साम्राज्य के जनक या स्थापक के रूप में आने की संभावना बनेगी। पं.जवाहरलाल नेहरू,लाल बहादुर शास्त्री,आइंस्टीन,अटल बिहारी वाजपेयी और नरेन्द्र मोदी इस श्रम से ही किसी मंजिल को पा सके हैं। यही नहीं,अमेरिका,रूस,जापान तथा इंग्लैण्ड ने भी इसी श्रम से अनवरत उन्नति की है।

आप नेता बनें,अभिनेता,खिलाड़ी या कुछ और…आपको परिश्रम के बिना कुछ भी मिलना संभव नहीं है। आज १ मई को `श्रमिक दिवस` पर यदि मजदूरी-मजदूर की बात की जाए तो यह हमारे समाज का वह वर्ग है,जिस पर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी है। ये आज के मशीनी युग में भी सभी प्रकार के क्रियाकलापों की धुरी है,क्योंकि उद्‌योग,व्यापार,कृषि,भवन निर्माण,पुल एवं सड़कों के निर्माण आदि में मजदूरों के श्रम का महत्त्वपूर्ण योगदान है,भले ही फिर कितनी भी आधुनिक मशीनें आ चुकी हों। यह अलग बात है कि,आज भी किसी मजदूर को कई बार भूखा सोना पड़ता है,कम पैसा मिलता है और उसकी सरकारी महकमे में सुनवाई भी नहीं होती है। यद्यपि पहले की अपेक्षा मजदूरों की स्थिति में सुधार हुआ है। हां,ये जरुर है कि,भारतीय संविधान में श्रमिकों की सहूलियत के लिए जो प्रावधान रखे गए हैं,उनका लाभ उन्हें कम मिलता है। श्रमिकों से लिए जाने वाले काम का समय तय होने के बाद भी आज भी किसी भी क्षेत्र में उनका शोषण जारी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि,इस वर्ग के कल्याण-सुधार की दिशा में बहुत कुछ करने की अनिवार्य जरूरत है। यह असंगठित क्षेत्र है,इसलिए पेंशन तथा सामाजिक सुरक्षा इनके लिए बेहद जरुरी है। साथ ही सबको चाहिए कि,हम मजदूरों के श्रम का सम्मान करें। इन्हें किसी भी तरह से कम नहीं आंकते हुए राष्ट्र की प्रगति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला मानकर सभी फायदों को इन तक पहुंचाना चाहिए,तभी राष्ट्र की तरक्की में यह सच्चे भागीदार कहे जा सकेंगे। हां,आप किसी भी तरह से मेहनत करते हों तो भी उस पर हमेशा गर्व ही कीजिए,अभिमान नहीं।

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1 Comment

  1. प्रभात कुमार दुबे (प्रबुद्ध कश्यप) says:

    सुंदर आलेख,,,,

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