कुछ किया ही नहीं…

वकील कुशवाहा `आकाश महेशपुरी`
कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)

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मैं तो’ जीता रहा बस किसी के लिए।
कुछ किया ही नहीं जिंदगी के लिए।
क्या मुझे वो कहीं पर मिलेगी कभी,
मैं भटकता रहा जिस खुशी के लिए।
साथ देगा तुझे कष्ट में देखकर,
ये जरूरी है’ क्या आदमी के लिए।
जान मेरी रहे जिसके’ अंदर सदा,
मैं यहाँ आ गया हूँ उसी के लिए।
कितने’ सदमें हमें दे रही आजकल,
क्या मिली जिंदगी है इसी के लिए।
हमने’ यूँ ही गवां दी जवानी मगर,
भाग्य को कोसते हर कमी के लिए।
वह तो’ अपनों का’ ‘आकाश’ दिल तोड़कर,
जान देने चला अजनबी के लिए॥
परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में भी कुशीनगर में ही हैं,और स्थाई पता यही है। स्नातक तक शिक्षित श्री कुशवाहा क़ा कार्यक्षेत्र-शिक्षण(शिक्षक)है। आप सामाजिक गतिविधि में कवि सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक बुराईयों पर प्रहार करते हैं। आपकी लेखन विधा-काव्य सहित सभी विधाएं है। किताब-‘सब रोटी का खेल’ आ चुकी है। साथ ही विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आपको गीतिका श्री (सुलतानपुर),साहित्य रत्न(कुशीनगर) शिल्प शिरोमणी सम्मान(गाजीपुर)प्राप्त हुआ है। विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी से काव्यपाठ करना है। आकाश महेशपुरी की लेखनी का उद्देश्य-रुचि है। 

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