कुछ सवाल अपने-आप से…

डॉ. स्वयंभू शलभ
रक्सौल (बिहार)

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पर्यावरण दिवस विशेष………………………….
आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर आइए अपने-आप से कुछ सवाल करें…कि आने वाली पीढ़ी के लिए हम कैसी धरती और कैसा पर्यावरण देने जा रहे हैं…यह प्रश्न हमारे सामने यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा है और जब तक हम साथ मिलकर इसका जवाब ढूंढ नहीं लेते,तब तक यह दिवस केवल एक जागरूकता दिवस के रूप में सीमित रहेगा…हम इसे उत्सव की तरह नहीं मना पाएंगे…गंगा समेत देश की विभिन्न नदियों में तमाम उद्योगों और कल कारखानों द्वारा अनेक प्रकार के जहरीले रसायन बेरोक-टोक डाले जा रहे हैं। शहरों में नालों का निकास नदियों में कर देना सबसे आसान काम है। महानगरों का सीवर ड्रेनेज तंत्र भी आसपास की नदियों को बुरी तरह प्रदूषित कर रहा है। शहर का सारा कूड़ा-कचरा भी नदियों के किनारे डम्प कर दिया जाता है। नगर निकायों को भी कचरे के निष्पादन के लिए नदियों का तटवर्ती क्षेत्र सबसे सुरक्षित स्थान नजर आता है।
कई नदियों का जीवन समाप्त होने की कगार पर है। कमोबेश देश के हर छोटे-बड़े शहर में यही तस्वीर दिखाई देती है,लेकिन इसी के साथ-साथ नदियों को प्रदूषण से मुक्त किए जाने के लिए गैर सरकारी संगठनों और समाजसेवियों द्वारा आंदोलन भी चलते हैं। देश की कई बड़ी नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं भी चल रही हैं। ‘नमामि गंगे’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी हैं। देश में पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय है। प्रदूषण को रोकने के लिए केन्द्र के साथ राज्यों में भी बाकायदा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए देश में कानून है जिसका उल्लंघन किए जाने पर दंड का भी प्रावधान है। इन सबके साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक कानून भी हैं। साथ-साथ देश में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा व्यापक रूप से स्वच्छता अभियान भी चल रहा है।
बगैर उपचार परियोजना(ट्रीटमेंट प्लांट) लगाए उद्योगों को संचालित करना कानूनन जुर्म है। बावजूद इसके अनेक उद्योग-धंधे बगैर उपचार के चल रहे हैं।
ऐसे में इन सवालों का जवाब ढूंढना जरूरी है…
क्या हमने इस प्रदूषण के विरोध में कभी कोई कदम उठाया है…क्या हमारा स्वच्छता अभियान केवल हमारे घर तक सीमित है…क्या पर्यावरण से जुड़ी इस समस्या के लिए केवल सरकार या व्यवस्था दोषी है…क्या केवल आज के दिन पौधरोपण के नाम पर या हाथ में झाड़ू उठाकर गली-मोहल्ले की सफाई के नाम पर या बैनर और नारों के साथ रैली के नाम पर अपना फोटो सोशल मीडिया में डाल देने से या खबरों में सुर्खियां बटोर लेने से समस्या का हल निकल आएगा… क्या आज होने वाली जागरूकता दौड़ में शामिल होकर हमारी सोच बदल जाएगी…सरकार या प्रशासन कोई कदम उठाए,न उठाए,हमारा अपना कोई नैतिक दायित्व बनता है या नहीं…
कब तक ये बड़े-बड़े उद्योग जन जीवन को संकट में डालकर अपने निजी फायदे के लिए पर्यावरण और प्राकृतिक संपदाओं का दोहन करते रहेंगे…आने वाली पीढ़ी कभी हमें माफ नहीं करेगी…
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आइए इन बिन्दुओं पर सोचें,अपनी मानसिकता को बदलें और अपनी छटपटाहट और अपनी पीड़ा को एक-दूसरे के साथ साझा करते हुए अपने संकल्प को और मजबूत बनाएं…।

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