कुर्सी का खेल

संजयसिंह राजपूत
दादर(उत्तर प्रदेश)

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राम आपके देश में अब न जाने क्या क्या चल रहा है,
‘सबका साथ-सबका विकास’ जातिवादियों को खल रहा है।
जाति-वर्ग में बंटकर राम आपका जन्मस्थल जल रहा है,
शिक्षित युवा स्वरोजगार का पकौड़ा तल रहा है॥

दलित-शोषित के नाम पर दंगा भी करवाते हैं,
सच बोलने वाले विशेष दल के भक्त कहे जाते हैं।
दो घंटे का उपवास फिर मांस-पकौड़े खाते हैं,
हर समय बस लूटने की साज़िश और गरीब छले जाते हैं॥

आज़ाद भगत को छोड़ यहां नेता,अभिनेता पूजे जाते हैं,
बिलख पड़ता चौथा स्तंभ,जब नामचीन जेल जाते हैं।
क्या पहना,खाया,सोया कैसे,चौबीस घंटे दिखलाते हैं,
समझ नहीं आता नई पीढ़ी को क्या गुर सिखलाते हैं॥

परिचय: संजयसिंह राजपूत की जन्मतिथि-१० जून १९९० और जन्म स्थान-दादर है। आप वर्तमान में ग्राम-दादर(तहसील-सिकंदरपुर,बलिया)में ही बसे हुए हैं। उत्तर प्रदेश से नाता रखने वाले श्री सिंह की शिक्षा-एम.ए. (हिंदी) है। आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक होने के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में महावीर धाम सोसायटी(दादर)से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा में कविता,लेख और कहानी लिखते हैं। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय श्री राजपूत के लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बदलाव लाना है।

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