कुवाँरी कंचन काया

मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’ 
इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश)

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विचलित मन आनंदित तन संग,पिय के हिय की राह चली,
स्वप्न धरा नव लोक नयन में,मन पावन की चाह भली।
सूत्र पिरोऊँ नव मोतिन की,बाबुल की अब छोड़ गली,
कैसे छोड़ूँ हाथ पिता का,माता की हूँ गोद पली।
लाड़-प्यार में जीवन बीता,हूँ मैं उनकी प्यारी लली,
आज कुवाँरी कंचन काया,गठबंधन के सूत्र बँधीll

नव आशा मधुमय जीवन का,स्वप्न सजाकर आयी हूँ,
दो कुल आनंदित करने का,भाव ह्दय में बसाई हूँ।
हाथ में मेंहदी,बाल में गजरा,कजरा नयन सजाई हूँ,
झुके नयन मुस्कान मधुर संग,पुष्प सुगंधित लाई हूँ।
पिया मिलन की आश सजाए,नववधू बन नव रंग ढली,
आज कुँवारी कंचन काया…ll

पाणिग्रहण करके अपनाया,धान्य समर्पित कर सुख पाया,
आशा के नवदीप जलाकर,ज्योतिपुंज-सा प्रियतम भाया।
अब तुम संग जीवन की छवि है,एक-दूजे की हम हैं छाया,
एक सूत्र गठबंधन का है,लगता है यह प्रभु की माया।
प्रभु दम्पत्ति की रचना करके,सृष्टि रचयिता रीति चली,
आज कुँवारी कंचन काया…ll

जीवन पथ पर साथ चलेंगें,दोनों कुल की लाज धरेंगें,
तन-मन-धन न्यौछावर करके,प्रीत के हित में काज करेंगें।
किया समर्पित जीवन धन है,बाधाएँ हम साथ हरेंगें,
साथ सदा हर पथ पर देंगें,स्नेह सुधा रस पान करेंगें।
सुखमय होगा अपना जीवन,मधु प्रार्थना सदा फली,
आज कुँवारी कंचन काया कंचन काया,गठबंधन के सूत्र बँधीll

परिचय-मधु शंखधर का उपनाम ‘स्वतंत्र’ हैl जन्म १५ अगस्त को इलाहाबाद में हुआ हैl शिक्षा-स्नात्कोत्तर(हिन्दी,इतिहास)हैl
लेखन विधा-गद्य,पद्य कथा,कविता,नवगीत,सामयिक लेख, निबंध,यात्रा वृतांत इत्यादि हैl विभिन्न राष्ट्रीय स्तरीय पत्र- पत्रिकाओं में इनकी रचनाओं का निरन्तर प्रकाशन हुआ हैl आपको सम्मान में मेघालय के राज्यपाल द्वारा गोयनका स्मृति सम्मान पत्र व महाराज कृष्ण जैन सम्मान पत्र और शांति देवी अग्रवाल स्मृति सम्मान पत्र इत्यादि प्राप्त है। आपका कार्य क्षेत्र अध्यापन हैl इनका निवास ममफोडगंज इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश)हैl 

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