केवल हो विश्वास

तोषण कुमार चुरेन्द्र
लोहारा(छत्तीसगढ़)
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गलती मेरी देख के,करना मुझको माफ।
जितने मन में मैल है,हो जाए सब साफ॥

देख सखी बरसात में,पवन मचाए शोर।
नाचत मयूरा देख के,मनवा उठे हिलोर॥

जब सावन-आषाढ़ में,मेंढक शोर मचाय।
होकर दिल मजबूर ये,चाहत गीत सुनाय॥

सावन में सब है हरा,हरा है खेती खार।
होती हरियाली परब,मगन भए संसार॥

फूँक-फूँक रख लो कदम,मन में रख लो बात।
लेकर दीपक सब चलो,कट जाएगी रात॥

चल-चल साथी साथ तू,ले मशाल जो हाथ।
करता सबपे है दया,मेरे दीनानाथ॥

मेरा-तेरा कुछ नहीं,सब माया बाजार।
है दो दिन की जिंदगी,सबसे कर लो प्यार॥

इस कलयुग संसार में,केवल हो विश्वास।
धरम-करम होगा सदा,है ‘तोषण’ को आस॥

आता-जाता कुछ है नहीं,कैसे लिखता छंद।
पढ़ा-लिखा ज्यादा नहीं,हूँ मैं जी मतिमंद॥

परिचय-तोषण कुमार चुरेन्द्र की जन्मतिथि २८ जून १९८४ एवं जन्म स्थान धनगाँव,डौंडी लोहारा हैl वर्तमान में आप लोहारा जिला-बालोद (छ.ग.)में ही बसे हुए हैंl स्थाई पता भी यही हैl संपदा वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश के तोषण कुमार चुरेन्द्रग्राम ने स्नातक सहित डी.एड. किया हुआ हैl आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक (निजी शाला, लोहारा)हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत लोहारा में ही समाज से सक्रियता से जुड़े हुए हैंl आपकी लेखन विधा-गीत, ग़ज़ल, दोहा, मुक्तक,  कुंडली तथा हाइकु हैl आप हिन्दी के अलावा छत्तीसगढ़ी में भी लेखन करते हैंl `हाइकु की सुगंध` में आठ हाइकु का प्रकाशन हो चुका हैl ब्लॉग पर भी लिखते हैंl लेखनी का उद्देश्य-लेख के माध्यम से जन जागरण करना हैl

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