कैसे करें,विश्वास बताओ

जसवंतलाल खटीक
राजसमन्द(राजस्थान)
*************************************************************

अब नहीं,रहा विश्वास,
सब के सब हैं,धोखेबाज़।
मुँह में राम,बगल में छुरी,
गिराते,एक-दूजे पे गाज़ll

कैसे करें,विश्वास,बताओ,
छल-कपट,का साया है।
चाहे,कुछ भी हो जाए पर,
चाहिए,सबको माया हैll

भाई-भाई,आपस में लड़ते,
विश्वास,को ताक में रखकर।
जमीन,जायदाद की खातिर,
तलवारें,चलती है जमकर ll

पराए की बात,तुम छोड़ो,
अब,अपने का,विश्वास नहीं।
रिश्तों को,शर्मसार करते,
आती,इनको लाज नहींll

भगवान,के ऊपर से भी,
विश्वास,देखो उठ गया।
काम ना हो तो,बदल लेते,
कहते,भगवान रूठ गयाll

जानवर पर है,फिर भी विश्वास,
पर इंसान से,विश्वास उठ गया।
अब तो बचा,राज बेईमानों का,
हरिशचन्द्र वाला,राज लूट गयाll

विश्वास बिचारा,इस कलयुग में,
घुट-घुटकर के मर रहा।
`जसवंत` देखो,पगला गया,
विश्वास,की बातें कर रहाll

परिचय-जसवंतलाल बोलीवाल (खटीक) की शिक्षा बी.टेक.(सी.एस.)है। आपका व्यवसाय किराना दुकान है। निवास गाँव-रतना का गुड़ा(जिला-राजसमन्द, राजस्थान)में है। काव्य गोष्ठी मंच-राजसमन्द से जुड़े हुए श्री खटीक पेशे से सॉफ्टवेयर अभियंता होकर कुछ साल तक उदयपुर में निजी संस्थान में सूचना तकनीकी प्रबंधक के पद पर कार्यरत रहे हैं। कुछ समय पहले ही आपने शौक से लेखन शुरू किया,और अब तक ६५ से ज्यादा कविता लिख ली हैं। हिंदी और राजस्थानी भाषा में रचनाएँ लिखते हैं। समसामयिक और वर्तमान परिस्थियों पर लिखने का शौक है। समय-समय पर समाजसेवा के अंतर्गत विद्यालय में बच्चों की मदद करता रहते हैं। इनकी रचनाएं कई पत्र-पत्रिकाओं में छपी हैं।

Hits: 10

आपकी प्रतिक्रिया दें.