कोसने की बजाए काम करे सरकार

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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बिना कारण के कोई काम नहीं होता है। आजकल राजनीति में, सामाजिक व्यवस्थाओं में और परिवार में ‘ही’ शब्द का बहुत उपयोग होता है,जो विवादों को जन्म देता है,जबकि ‘भी’ समाधानकारक होता है। इसका तात्पर्य है कि,आप दूसरों की भावना को इज़्ज़त दो। ही एकांतवादी है और भी अनेकांतवादी है। ही शब्द पश्चिमी संभ्यता का घोतक है और भी भारतीय संस्कृति का पोषक है। सापेक्षता के सिद्धांत का जीवन में अनुसरण न होने से विवाद-युद्ध का होना निश्चित होता है।
अब बात राहुल गाँधी की,तो जो तर्क दिए भारत की स्थिति के,उनके दृष्टिकोण से सही भी हैं। सरकार ने जितने वादे किए,क्या वे पूरे हुए ? मोदी जी का कहना है कि सत्तर वर्षों में देश में कुछ नहीं हुआ,तो प्रश्न ये है कि आप वर्ष २०१४ से क्या नई उपलब्धि लाए। बेरोजगारी का आंकड़ा शून्य,आर्थिक क्षेत्र में कितनी उपलब्धि,नोटबंदी, जीएसटी ने जितनी अपेक्षाकृत ऊंचाई छूनी थी,वह नहीं छू पाई। भीड़वाद के कारण हत्याओं का प्रतिशत बढ़ा है। दूसरी तरफ वर्तमान सरकार अपने मुँह मियां मिठ्ठू बनकर आकंड़ों से अपनी प्रगति दिखा रही है। आज निष्पक्ष जांच शुरू हो जाए तो पूरी स्थिति साफ़ हो जाएगी। मांस निर्यात में अग्रणी है सरकार।
प्रधान सेवक का कोई भी भाषण पुरानी सरकार और एक परिवार का उदाहरण न दे तो पूरा नहीं होता,पर कब तक किसको कोसेंगे। आप अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर बताते और कहीं असफल होते हैं तो समय की कमी बताते हैं। क्या आपको अभी पूरा समय नहीं मिल पा रहा है। आपको तो मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने की आदत है। स्व प्रशंसा और पर निंदा के बिना आपका भोजन नहीं पचता। जब आप कांग्रेस दल की निंदा करते-करते नहीं थकते तो कांग्रेस भी आपकी कमियां बताती है। तब आपको अपनी बेइज़्ज़ती लगती है। आपने भी विश्व के सभी स्तरों पर आत्मप्रशंसा और पर निंदा का सूत्र बनाकर रखा है। आप हमेशा कहते हैं-“देश में कोई प्रगति-विकास नहीं हुआ विगत ७० वर्षों में।” यह क्या कोई सम्मानजनक स्थिति है। जितना भी विकास हुआ,वो भी खोखला और आपके कार्यकाल में हुआ है।
आपका कहना है कि,पूरे देश के प्रत्येक जिले में चिकित्सा महाविद्यालय खोले जाएंगे,सब जगह प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले जाएंगे। यह बहुत बढ़िया घोषणा है,पर बिना शस्त्र के सेना क्या कर लेगी ? इतने महाविद्यालयों के लिए पढ़ाने वाले कहाँ से आएंगे,और इसमें प्रवेश के लिए कितने गोरख धंधे चल रहे हैं। वर्तमान में जो हैं,उनमें कितनी रिक्तियों में नौकरी दी गई है..! दिवास्वप्न की स्थिति है। विद्यालयों-महाविद्यालयों की स्थिति और दयनीय है। संविदा नौकरियों के कारण शासकीय कार्य-कलाप का स्तर बहुत दीन-हीन है। बेहतर हो कि पहले जो स्थापित संस्थाएं हैं,उनको विकसित करें,समुचित सुविधाएँ मुहैया कराएं। मात्र ताली बजवाने से कोई काम नहीं होता है।
यदि विरोधी कोई भी बात विपरीत बोलते हैं तो उसको गंभीरता से सुनें,समझे और प्रतिक्रिया दें,न कि उसके कथन को दरकिनार या उपेक्षित कर देना ठीक है। फिलहाल स्वस्थ राजनीति का चिंतन नहीं है। वर्तमान में हम लोग आंकड़ों की दुनिया में जी रहे हैं।
क्यों वर्तमान सरकार गाँधी जी के नाम से रोटियां सेंक रही है। यह दोहरा चरित्र नहीं दिखाई देता है। क्या टिप्पणी करने वाली मेरठ की जज कानून या संविधान से ऊपर हैं। इस बात पर भाजपा प्रवक्ता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसका मतलब उनकी मौन स्वीकृति है,इससे देश की इज़्ज़त बढ़ी है ?
राहुल गाँधी ने जो बात कही,वह एक अपेक्षा से सही है। कारण कि आजकल बेरोजगारी के कारण अपराध बढ़ रहे हैं,जीएसटी से व्यापार में फर्क आया है। आज जातिवाद, आदिवासी भाइयों और सवर्ण के बीच भेदभाव और सबसे अच्छा हिन्दू- मुस्लिम विवाद यानि मंदिर-मस्जिद विवाद सर्वकालीन है। अज्ञात भय से ऐसा वातावरण बना दिया है कि पूरी सुरक्षा का ठेका इनके पास ही है। सत्ता के मद में चूर होने से वे जो भी बोलते हैं,वो ब्रह्म वाक्य और वही बात दूसरा बोले तो देशद्रोही हो जाता है।
पूरा देश इस समय विकास के नाम पर खोखला हो रहा है। विकास किस चिड़िया का नाम है,समझ से परे है। पूरा देश और दल परिकल्पना में जी रहा है और देश को गुमराह किया जा रहा है। प्रधान सेवक को रात में सपना आया और काम शुरू। अब चुनाव का समय आ गया तो हकीकत सामने आने से घबराहट शुरू हो गई है,पर सत्ता में होने से उसके लाभ जरूर मिलते हैं।
ख़ासकर राजस्थान, मध्यप्रदेश में जो जनयात्रा निकाली जा रही है,वो सरकारी धन द्वारा और जनता के पैसे का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग है,पर प्रधान सेवक और मुख्य सेवक मौन हैं। जब दल का काम है तो दल खर्च वहन करे,पर नहीं।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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