क्या खोया-क्या पाया

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’
मुंबई(महाराष्ट्र)
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अब तक जाने क्या-क्या हमने,निज जीवन में खोया है,
नफरत के बीजों को हमने,निजी स्वार्थ में बोया है।

और फसल जब उगी तो देखो,कितनी पीड़ा दायी है,
दिन में भी घनघोर अंधेरी,निशा कालिमा छाई है।

नेह-स्नेह या प्रीत-प्रेम सब,नफरत निगल गई सारे,
गैरों की तो बात छोड़ दो,हम तो अपनों से हारे।

हिंदू मुस्लिम सिक्ख इसाई,सबमें भाईचारा था,
इस धरती पर देश हमारा,सारे जग से न्यारा था।

नफरत की इस आँधी में हम,पत्तों जैसे बिखर गए,
और नेह के मूल्य सनातन,उनसे भी हम मुकर गए।

ईद दिवाली बैशाखी हम,क्रिसमस खूब मनाते थे,
भंग मिली ठंडाई थी तो,खूब सेंवईयाँ खाते थे।

हाथ मिलाना-गले लगाना,प्रेम जताना होता था,
सुख-दु:ख में इक-दूजे के घर,आना-जाना होता था।

मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे सब,अपने और हमारे थे,
यीशू हो भगवान खुदा या,गुरूग्रंथ भी प्यारे थे।

नफरत की इन फसलों का, अंजाम नहीं हम पढ़ पाए,
नेह-स्नेह के ताजमहल थे,बोलो हमने क्यूँ ढाए ??

परिचय-ओमप्रकाश अग्रवाल का साहित्यिक उपनाम ‘बबुआ’ है।आप लगभग सभी विधाओं (गीत, ग़ज़ल, दोहा, चौपाई, छंद आदि) में लिखते हैं,परन्तु काव्य सृजन के साहित्यिक व्याकरण की न कभी औपचारिक शिक्षा ली,न ही मात्रा विधान आदि का तकनीकी ज्ञान है।आप वर्तमान में मुंबई में स्थाई रूप से सपरिवार निवासरत हैं ,पर बैंगलोर  में भी  निवास है। आप संस्कार,परम्परा और मानवीय मूल्यों के प्रति सजग व आस्थावान तथा देश-धरा से अपने प्राणों से ज्यादा प्यार है। आपका मूल तो राजस्थान का झूंझनू जिला और मारवाड़ी वैश्य है,परन्तु लगभग ७० वर्ष पूर्व परिवार उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में आकर बस गया था। आपका जन्म १ जुलाई को १९६२ में प्रतापगढ़ में और शिक्षा दीक्षा-बी.कॉम.भी वहीं हुई है। आप ४० वर्ष से सतत लिख रहे हैं।काव्य आपका शौक है,पेशा नहीं,इसलिए यदा-कदा ही कवि मित्रों के विशेष अनुरोध पर मंचों पर जाते हैं। लगभग २००० से अधिक रचनाएं आपने लिखी होंगी,जिसमें से लगभग ७०० का शीघ्र ही पाँच खण्डों मे प्रकाशन होगा। स्थानीय स्तर पर आप कई बार सम्मानित और पुरस्कृत होते रहे हैं। आप आजीविका की दृष्टि से बैंगलोर की निजी बड़ी कम्पनी में विपणन प्रबंधक (वरिष्ठ) के पद पर कार्यरत हैं। कर्नाटक राज्य के बैंगलोर निवासी श्री  अग्रवाल की रचनाएं प्रायः पत्र-पत्रिकाओं और काव्य पुस्तकों में  प्रकाशित होती रहती हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जनचेतना है।     

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