क्या पाया-क्या खोया

सुषमा मलिक 
रोहतक (हरियाणा)

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दिल जाने इस दुनिया में मैंने,
क्या पाया-क्या खोया है।
वफ़ा के पथ पर चलकर मेरा
दिल भी ​जोरों से रोया है॥

झूठ की बुनियाद ​से उसने​,​
खुदगर्जी का महल बनाया।
स्वार्थ को दे रिश्ते का नाम,
वो नींद चैन की सोया है॥

फूल बो कर भी ‘मलिक’ ​तेरे,​
हाथ खून से तर-बतर हुए,
वो क्या भुगतेगा जिसने,
कांटा ही कांटा बस बोया है॥

उम्मीद करुं तो क्या उससे,
जो अर्थ जाने ना रिश्ते का।
मैंने ​हमेशा​ अपनेपन में,
उस बेवफा का रिश्ता ढोया है॥

धूल और जंग चढ़ाई जिसने,
उस खुदगर्जी के रिश्ते पर।
उसके दिए दर्दों को मैंने,
अपने इन आंसूओं से धोया है॥

दर्द भी है घुटन भी है,पर
शब्द नहीं है ​’सुषमा’ कहने को,
सुकूँ है कि वो उन्मुक्त हो
​किसी की​ पनाहों में सोया है॥

जाने इस दुनिया में ‘मलिक’,
क्या पाया-क्या खोया है।
वफ़ा के पथ पर चलकर,
​मेरा दिल भी जोरों से रोया है॥

परिचय : रोहतक निवासी सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक स्थित शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक का कार्यक्षेत्र विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल का है। आप सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं निरन्तर आती रहती हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख साहित्यिक संस्था सहित अन्य संस्थाओं ने भी आपको सम्मानित किया है। आपकी दृष्टि से लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।

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