क्रिकेट के नए भगवान का अवतरण

डाॅ.देवेन्द्र जोशी 
उज्जैन(मध्यप्रदेश)

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भारतीय क्रिकेट टीम का एक और सितारा क्रिकेट का भगवान बनने के रास्ते पर चल पड़ा है। जी हाँ,यहाँ बात हो रही है भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और विश्व के सर्वश्रेष्ठ और फिट बल्लेबाज विराट कोहली की,जिन्होंने क्रिकेट मैचों में सबसे तेज १० हजार रन बनाकर न केवल सचिन तेन्दुलकर अपितु सौरभ गांगुली और जैक काॅलिस जैसे न जाने कितने बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। विराट का अब तक का सफर क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेन्दुलकर से भी काफी तेज रहा है। सचिन को जहां १० हजार रन पूरे करने में २५९ पारियों में ११ वर्ष से अधिक का समय लगा था,वहीं विराट ने विश्व शिखर पर पहुंचने का यह कारनामा महज २०५ पारियों में १० वर्ष २ माह में कर डाला। औसत और शतकीय पारी में भी विराट का प्रदर्शन सचिन से बेहतर रहा है।
इन आंकड़ों का उद्देश्य विराट और सचिन की तुलना करना या किसी को ऊंचा-नीचा दिखाना नहीं है,बल्कि बदली हुई परिस्थितियों में उभरते क्रिकेट सितारे का यथेष्ठ मूल्यांकन करना है। चूँकि,भारतीय क्रिकेट के अब तक के ज्यादातर विश्व कीर्तिमान सचिन तेन्दुलकर के नाम रहे हैं,इसलिए जब भी कोई बल्लेबाज उन रिकार्ड को तोड़ता है तो स्वाभाविक रूप से उसके साथ सचिन तेन्दुलकर का नाम आ ही जाता है। सचिन भारतीय क्रिकेट का अब तक का वो `मील का पत्थर` है,जिससे होकर के कोई क्रिकेट सितारा अपने नाम का परचम लहरा सकता है। अब वही `मील का पत्थर` विराट बनने जा रहे हैं। विराट कोहली अगर इसी गति से रन बनाते रहे तो वे सचिन के अन्य कीर्तिमान भी ध्वस्त करने में कामयाब हो सकते हैं। इस रिकार्ड को तोड़ने के बाद सचिन का वन-डे मैचों में ४९ शतकों का रिकार्ड स्वाभाविक रूप से विराट के निशाने पर आ गया है।अपनी रन बनाने की वर्तमान गति को उन्होंने बरकरार रखा तो आने वाले तीन वर्षों में वे इस लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इस समय विराट कोहली के वन-डे मैचों में शतकों की संख्या ३७ और उनकी उम्र ३० साल है। उनकी स्वस्थता को देखते हुए लगता है कि वे आसानी से ३५ की उम्र तक खेल सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो तब तक अनेक नए कीर्तिमान उनके नाम होंगे। विराट की सफलता का राज स्वास्थ्य के प्रति उनका चौकन्नापन है। आज उनकी गिनती दुनिया के सबसे स्वस्थ खिलाड़ियों राफल नडाल और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के साथ होती है। विराट न तो खुद अपनी स्वस्थता के साथ कोई समझौता करते हैं,और न ही टीम के कप्तान के रूप में किसी की अस्वस्थता को बर्दाश्त करते हैं। कई खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाने का कटु निर्णय भी उन्हें एकाधिक बार लेना पड़ा है। यही वजह है कि,वर्तमान भारतीय क्रिकेट टीम को अब तक की सबसे स्वस्थ टीम माना जाता है। पूर्व कप्तान महेन्द्रसिंह धोनी का कहना है कि विराट कोहली स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हैं। इस कारण भारतीय क्रिकेट टीम आज बाॅलिंग,बेटिंग और फील्डिंग तीनों मोर्चों पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। एक समय सबसे कमजोर कड़ी मानी जाने वाली भारतीय टीम की फील्डिंग में हाल के दिनों में हुए आकस्मिक सुधार के मूल में असली वजह टीम की स्वस्थता पर ध्यान देना ही है। एक समय सचिन तेन्दुलकर को `क्रिकेट का भगवान` माना जाता था, लेकिन गत दिनों वेस्ट इंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट में विराट ने सबसे तेज १० हजार रन बनाने का सचिन तेन्दुलकर का रिकार्ड तोड़ा तो बांग्लादेश के क्रिकेटर तमीम इकबाल ने एक साक्षात्कार में कहा कि,विराट के खेलने के अंदाज को देखकर लगता नहीं कि वह इंसान है। मतलब साफ है कि भारतीय क्रिकेट में सचिन के बाद एक और भगवान जन्म ले चुका है, जिसके करिश्माई करानामे की शुरुआत हो चुकी है। इसमें अस्वाभाविक भी कुछ नहीं है। भगवान की दुनिया हो या कोई अन्य दुनिया,समय के बदलाव के साथ नए अवतारों का जन्म लेना सामान्य बात है। अगर आने वाले पांच सालों में विराट के कीर्तिमान सचिन से आगे निकल जाएं और विराट क्रिकेट के नए भगवान के रूप में पूजे जाने लगें तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। कम से कम आज की उनकी रफ्तार को देखकर तो ऐसा ही लगता है।
एक बल्लेबाज के रूप में विराट अपनी सर्वश्रेष्ठता साबित कर चुके हैं,लेकिन एक कप्तान के तौर पर उन्हें इंग्लैंड,दक्षिण अफ्रीका,ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में टेस्ट मैचों में खुद को साबित करना अभी बाकी है। विराट की खूबियों की अगर बात करें तो अपनी कमियों से सीखने और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और हौंसला बनाए रखने में उनका कोई सानी नहीं है। सचिन तेन्दुलकर जहां एक स्वाभाविक प्रतिभा थे,वहीं विराट ने परिश्रम से अपनी प्रतिभा को निखार कर मौजूदा मुकाम तक पहुंचाया है। सचिन अगर टैक्स्ट बुक क्रिकेट प्लेयर हैं,तो विराट कौशल की कारीगरी की भट्टी में तपकर कुन्दन बने क्रिकेटर हैं, जिसे अभी अनेक कीर्तिमान अपने नाम करना है। उम्मीद की जानी चाहिए कि,जीत,सफलता और शोहरत की बुलन्दियों के खुमार से खुद को मुक्त रखते हुए वे अपने प्रशंसकों की उम्मीद पर खरे उतरते हुए भारतीय क्रिकेट को सफलता के नए क्षितिज की ओर ले जाते रहेंगे।

परिचय–डाॅ.देवेन्द्र जोशी का निवास मध्यप्रदेश के उज्जैन में हैl जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६२ और जन्म स्थान-उज्जैन (मध्यप्रदेश)है। वर्तमान में उज्जैन में ही बसे हुए हैं। इनकी पूर्ण शिक्षा-एम.ए.और पी-एच.डी. है। कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता होकर एक अखबार के प्रकाशक-प्रधान सम्पादक (उज्जैन)हैं। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप एक महाविद्यालय-एक शाला सहित दैनिक अखबार के संस्थापक होकर शिक्षा,साहित्य एवं पत्रकारिता को समर्पित हैं। पढ़ाई छोड़ चुकी १००० से अधिक छात्राओं को कक्षा १२ वीं उत्तीर्ण करवाई है। साथ ही नई पीढ़ी में भाषा और वक्तृत्व संस्कार जागृत करने के उद्देश्य से गत ३५ वर्षों में १५०० से अधिक विद्यार्थियों को वक्तृत्व और काव्य लेखन का प्रशिक्षण जारी है। डॉ.जोशी की लेखन विधा-मंचीय कविता लेखन के साथ ही हिन्दी गद्य और पद्य मेंं चार दशक से साधिकार लेखन है। डाॅ.शिवमंगल सिंह सुमन,श्रीकृष्ण सरल,हरीश निगम आदि के साथ अनेक मंचों पर काव्य पाठ किया है तो प्रभाष जोशी,कमलेश्वर जी,अटल बिहारी,अमजद अली खाँ,मदर टैरेसा आदि से साक्षात्कार कर चुके हैं। पत्रिकाओं सहित देश- प्रदेश के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्रों में समसामयिक विषयों पर आपके द्वारा सतत लेखन जारी है। `कड़वा सच`( कविता संग्रह), `आशीर्वचन`, आखिर क्यों(कविता संग्रह) सहित `साक्षरता:एक जरूरत(अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता वर्ष में प्रकाशित शोध ग्रन्थ) और `रंग रंगीलो मालवो` (मालवी कविता संग्रह) आदि आपके नाम हैl आपको प्राप्त सम्मान में प्रमुख रुप से अखिल भारतीय लोकभाषा कवि सम्मान, मध्यप्रदेश लेखक संघ सम्मान,केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड सम्मान,ठाकुर शिव प्रतापसिंह पत्रकारिता सम्मान,वाग्देवी पुरस्कार,कलमवीर सम्मान,साहित्य कलश अलंकरण और देवी अहिल्या सम्मान सहित तीस से अधिक सम्मान- पुरस्कार हैं। डॉ.जोशी की लेखनी का उद्देश्य-सोशल मीडिया को रचनात्मक बनाने के साथ ही समाज में मूल्यों की स्थापना और लेखन के प्रति नई पीढ़ी का रुझान बनाए रखने के उद्देश्य से जीवन लेखन,पत्रकारिता और शिक्षण को समर्पण है। विशेष उपलब्धि महाविद्यालय शिक्षण के दौरान राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद स्पर्धा में सतत ३ वर्ष तक विक्रम विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व और पुरस्कार प्राप्ति हैl आपके लिए प्रेरणा पुंज-माता स्व.श्रीमती उर्मिला जोशी,पिता स्व.भालचन्द्र जोशी सहित डाॅ.शिवमंगल सिंह सुमन,श्रीकृष्ण सरल,डाॅ.हरीश प्रधान हैं। आपकी विशेषज्ञता समसामयिक विषय पर गद्य एवं पद्य में तत्काल मौलिक विषय पर लेखन के साथ ही किसी भी विषय पर धारा प्रवाह ओजस्वी संभाषण है। लोकप्रिय हिन्दी लेखन में आपकी रूचि है।

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