खट्टर सरकार का मानसिक आर्थिक दिवालियापन !

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
*****************************************************
             हरियाणा सरकार हमेशा विवाद ग्रस्त रहती है। कहावत भी है कि-‘शायर,शेर,सपूत हमेशा भीड़ से हटकर चलते हैं’। दूसरा ‘जा के पैर न फटे बिवाई,वो का जाने पीर पराई’ और तीसरा जो परिवार विहीन होते हैं वो बहुत कृपण और संकीर्ण सोच वाले होते हैं। ऐसे ही जो विशेष संगठन से जुड़े होते हैं उनकी प्रकृति क्षुद्र होती है। ऐसा पुराणों में आलेख है कि जब राजा साधु मुनियों के ग्रास पर या प्रथम निवाले पर ‘कर’ लगाता है तो मानकर चलो कलयुग आना शुरू हो गया। कलियुग में जितने भी प्राकृतिक कार्य होते हैं,वे विपरीत लगने लगते हैं और विपरीत कार्य स्वाभाविक होने लगते हैं। शास्त्रों में लिखा है कि राजा,मंत्री को परिवार वाला होना चाहिए,जिससे वह पारिवारिक स्थिति को समझकर शासन स्तर पर निर्णय ले सके।
                    हरियाणा सरकार ने यह आदेश निकाला कि राज्य के खिलाड़ी अपनी कमाई की राशि का तीस प्रतिशत शासन को दें या कोषालय में जमा कराएं! बिलकुल सही है,कारण उनके राज्य की प्रतिभा ने राज्य,देश का गौरव बढ़ाया जिसके लिए उनको जजिया कर देना चाहिए। यानि खिलाड़ियों द्वारा अर्जित धन उनके दिवालिया घोषित कोषालय में जमा करें। यह कितना घटिया और निम्म मानसिकता का आदेश है जो दिखाता है कि-नीच निवास ऊंच करतूति,देख सखी न परायी विभूति’। खैर,खिलाड़ी कर भी क्या कर सकते हैं। कारण उन्होंने स्वयं के पुरुषार्थ से वह धन, पदक और प्रतिष्ठा कमाई है जिसके लिए उन्होंने अपना तन,मन,धन, श्रम,परिश्रम,समय की क़ुरबानी दी और बिना किसी अपेक्षा से स्वयं का प्रदर्शन कर,प्रतिभा के बल पर जीत हासिल कर देश का नाम गौरवान्वित किया। इस पर उस प्रदेश के मुखिया को गौरव करना चाहिए था,उसकी जगह उनसे पाई  हुई रकम का ३० प्रतिशत जमा कराने का कह रहे हैं।
                         भट्टर जी और उनका मंत्रि-मंडल क्या अपने वेतन-भत्ते से कटौती कर सरकार के खजाने में जमा करा रहे हैं ? यदि इतना नहीं कर सकते तो जो धन अन्य आय से या सुविधा शुल्क से प्राप्त करते हैं,उसे ही सरकारी खजाने में जमा कराएं,वह भी खुले में नहीं तो अनाम के नाम से ही सही। ये बिना परिवार के वेतन भत्तों,सुख-सुविधाओं का सुख नहीं त्यागना चाहते और जिन्होंने राज्य और देश का नाम रोशन किया,उनसे यह अपेक्षा रखना बहुत लानत की बात है। ऐसी सरकार को धिक्कार और आदेश देने वालों को पानी में डूब जाना चाहिए। यह आदेश कितनी घटिया मानसिकता का घोतक है।
                सरकार का यह कर्त्तव्य  होना चाहिए कि,यदि उनकी सुविधाओं में कोई कमी हो उनकी पूर्ति करें और उपयुक्त सुविधाएँ दें,जिससे उनका मनोबल बढ़े। इस आदेश पर पहलवान सुशील कुमार का कहना है कि ऐसी नीति कहीं देखी-सुनी नहीं। खिलाड़ियों को खुले मन-मष्तिष्क से खेलने का अवसर मिलना चाहिए। इधर खिलाड़ी बबीता फोगट का कहना है कि उन खिलाड़ियों को कितना बलिदान और परिवार को देना पड़ता है,जिसके कारण पदक लाते हैं। योगेश्वर दत्त कहते हैं कि,  भगवान बचाए ऐसे मंत्री और अधिकारियों से। इनका खेल विकास में कितना योगदान है,पर यह जरूर है कि खेलों की गिरावट में इनका अमूल्य योगदान होगा।
                        अनेक प्रकार के विरोध के बाद सरकार ने यह आदेश वापिस ले लिया,पर इस आदेश से सरकार का मानसिक और आर्थिक दिवालियापन दिखाई दे गया है। इस समय राज्य में ‘कर’ की कमी नहीं है,हरियाणा सरकार एक-एक रूपया भीख वाला कर जनता पर लगा दे और हर मंत्री,विधायक एक-एक कटोरा अपने अपने घर-कार्यालय-बंगला में रख लें या लगा दें,जिसमें प्रति नागरिक एक-एक रूपया डालकर कोष वृद्धि कर सकता है। वैसे भी मुख्यमंत्री संघ के कार्यकर्ता रहे,परजीवी रहे,उनका कोई खर्च नहीं है। वो सबसे पहले आधा वेतन सरकार के कोष में जमा कर रसीद दिखाएं और जो अन्य आय जिससे चुनाव लड़ना है,तथा उनका विकास होना है,वह राशि भी जमा कराएं। तब दूसरों से यह अपेक्षा करना यथोचित होगा।
परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी() आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

Hits: 27

आपकी प्रतिक्रिया दें.