ख्वाईश है मेरी

हेमलता पालीवाल ‘हेमा’
उदयपुर (राजस्थान )
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भर लूँ आसमाँ को बाँहों में, 
यह ख्वाईश नहीं है मेरी।
किसी परिंदे को परवाज दूँ,
यह हसरत है मेरी।
समन्दर का सीना चीर लूँ,
ऐसी मेरी हस्ती नहीं है।
लहरों के संग-संग चलूँ,
ऐसी कश्ती है मेरी।
बाग पूरा बना डालूँ, 
वो बागवान नहीं हूँ मैं
पर बीज जमीन में दफन करुं, 
वो माली हूँ मैं।
भर सकूँ पेट सबका मैं, 
वो अन्नदाता नहीं हूँ मैंl 
एक निवाला किसी को, 
दे सकूँ ऐसी चाह है मेरी।
यूँ तो दुनिया में सब ओर,
दु:खों का पसरा डेरा हैl 
किसी एक का दर्द मिटाऊँ,
यह आरजू है मेरी।
चल सके कोई मेरी बाँह पकड़, 
वो बैसाखी बन जाऊँl 
बिन आँखों के ढूँढे पथ,
वो दृष्टि बन जाऊँ मैं।
कहती है `हेमा` सुन मौला, 
हर एक में तुझे पा सकूँ 
यही कामना है मेरीll 
परिचय – हेमलता पालीवाल का साहित्यिक उपनाम – हेमा है। जन्म तिथि -२६ अप्रैल १९६९ तथा जन्म स्थान – उदयपुर है। आप वर्तमान में सेक्टर-१४, उदयपुर (राजस्थान ) में रहती हैं। आपने एम.ए.और बी.एड.की शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। लेखन विधा-कविता तथा व्यंग्य है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-  साहित्यिक व सामाजिक सेवा है। 

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1 Comment

  1. Hema your aim is superb. To serve humanity is to serve God. God is love and love is God keep it up. Thanks

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