ख्वाब आँखों में पलता रहा…

गीता गुप्ता ‘मन’
उन्नाव (बिहार)
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मोम-सा दिल हमारा पिघलता रहा,
रात भर करवटें मैं बदलता रहा।

चांदनी रात थी चाँद आया न था,
दर्द रह-रह के दिल में उछलता रहा।

आहटें कह रही आज वो आ गए,
देख लूँ फिर तुझे दिल मचलता रहा।

देखते रह गए…राह तेरी इधर,
चाँद खिड़की पे मेरी उतरता रहा।

मुझको भी बता हो गयी क्या खता,
क्यूँ इरादा तेरा…यूँ बदलता रहा।

चाँद छूने की थी ख्वाहिशें इस कदर,
ख्वाब आँखों में `मन` की ये पलता रहाll

परिचय:गीता गुप्ता का साहित्यिक उपनाम ‘मन’ है। आपका जन्म ८ मई १९८७ को उत्तर प्रदेश की उन्नाव जनपद के बिहार ग्राम में हुआ है। वर्तमान में हरदोई(उ.प्र.) शहर में और स्थाई पता ग्राम राधागंज जिला उन्नाव (बिहार)है। स्नातक,परास्नातक तथा बीएड शिक्षित गीता गुप्ता का कार्यक्षेत्र -अध्यापन(प्रा. विद्यालय में शिक्षिका) है। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत,बाल कविता ग़ज़ल और हायकू आदि है। ‘मन’ की रचनाओं को स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में स्थान मिला है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मातृभाषा हिन्दी से प्रेम और इसका विश्व पटल पर सम्मान बढ़ाना है। हिन्दी और आंग्लभाषा की अनुभवी गीता गुप्ता की रुचि-बच्चों को पढ़ाने, कविता लिखने,संगीत सुनने एवं पुस्तकें पढ़ने आदि में है।

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