ख्वाब क्या मिला…

नौशाद वारसी
समस्तीपुर (बिहार)
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चेहरे पर सुंदरता क्या मिली,
खुद को विश्व सुंदरी समझने लगी।
     कोयल-सी आवाज क्या मिली,
खुद को लता मंगेशकर समझने लगी॥
       मुस्कान ऐसी क्या मिली,
खुद को जूही चावला समझने लगी।
         धन ज्यादा क्या मिला,
खुद को नीता अंबानी समझने लगी॥
        अमीरी का ख्वाब क्या मिला,
    खुद को स्वप्न परी समझने लगी
     दो पल की जिंदगी क्या मिली,
    खुद को स्वर्ग की रानी समझने लगी…॥
परिचय-नौशाद वारसी की जन्म तारीख ६ सितम्बर १९९१ है। आपका निवास समस्तीपुर,बिहार में है। शिक्षा-अंतरस्नातक (एम.ए.-राजनीति शास्त्र)है। इनका कार्यक्षेत्र-निजी संस्थान में मुख्य प्रशिक्षक का है। आप सामाजिक गतिविधि में शिक्षा,स्वास्थ्य,स्वच्छता,पर्यावरण अधिकार,आपदा और नशामुक्ति पर कार्य करते हैं । लेखन विधा-गजल,कविता,शायरी सहित मुक्तक,दोहे,लेख एवं कहानी है। श्री वारसी की लेखनी का उद्देश्य- सामाजिक परिवर्तन और साहित्यिक रुचि है। 

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