गीत नवरस

मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’
इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश)

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गीत नवरस मय खुशी का आज गाना चाहती हूँ।
आज हँसकर जिंदगी को गुनगुनाना चाहती हूँll 

दर्पणों ने ही दिखाया मिथक की अनुभूति सारी,
सत्य का वह रूप सुंदर मैं दिखाना चाहती हूँll 

लोभ,हिंसा,अतिचार शोषण व्यक्ति की आशा घनेरी,
नेह,समर्पित दीप पावन फिर जलाना चाहती हूँll 

सुता,भार्या,जननी असल सृष्टि की अनुपम धरोहर,
सृष्टि के आधार को सच बचाना चाहती हूँll 

रंक-राजा बन गया जो सद्य मधु जग व्यंजना है,
विभेद मिट जाएँ सकल यह बताना चाहती हूँll 

आर्य संस्कृति विश्व में भारती की पहचान शाश्वत,
ख्याति पुरा संस्कृति की नित बढ़ाना चाहती हूँll 

गीत इक ऐसा लिखूँ जो गुंजित करे धरती गगन,
`मधु` सदा होकर स्वतंत्र जयघोष सुनाना चाहती हूँll 

परिचय-मधु शंखधर का उपनाम ‘स्वतंत्र’ हैl जन्म १५ अगस्त को इलाहाबाद में हुआ हैl शिक्षा-स्नात्कोत्तर(हिन्दी,इतिहास)हैl
लेखन विधा-गद्य,पद्य कथा,कविता,नवगीत,सामयिक लेख, निबंध,यात्रा वृतांत इत्यादि हैl विभिन्न राष्ट्रीय स्तरीय पत्र- पत्रिकाओं में इनकी रचनाओं का निरन्तर प्रकाशन हुआ हैl आपको सम्मान में मेघालय के राज्यपाल द्वारा गोयनका स्मृति सम्मान पत्र व महाराज कृष्ण जैन सम्मान पत्र और शांति देवी अग्रवाल स्मृति सम्मान पत्र इत्यादि प्राप्त है। आपका कार्य क्षेत्र अध्यापन हैl इनका निवास ममफोडगंज इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश)हैl

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