गुलामी जाएगी…

हरिओम माहोरे `हरी`
सारसवाड़ा(मध्यप्रदेश)

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जिन्दगी ये आजमाई जाएगी,
जब यहाँ से जिंदगानी जाएगी।

कुछ कमाया तो नही हमने यहाँ,
साथ पर ये फौजदारी जाएगी।

गम नहीं है कुछ हमें जाने का भी,
जाएगी जब भी गरीबी जाएगी।

आँख से आँसू गिरेंगें जब यहाँ,
तब लिखी मेरी कहानी जाएगी।

जब सियासत भी यहाँ इठलाएगी,
तब कलम कवि की न खाली जाएगी।

तुम `हरी` अब देश की सोचो यहां,
जाएगी तो ये गुलामी जाएगीll

परिचय –हरिओम माहोरे का साहित्यिक उपनाम ‘हरी’ है। आपकी जन्मतिथि २९ दिसम्बर १९९८ एवं जन्म स्थान ग्राम-सारसवाड़ा(जिला-छिंदवाड़ा,म.प्र.)है। वर्तमान और स्थाई पता सारसवाड़ा, छिंदवाड़ा ही है। शिक्षा १२ वीं तक प्राप्त की है। इनका कार्यक्षेत्र-बाजार है। लेखन विधा-ग़ज़ल है। श्री माहोरे को प्राप्त सम्मान में सँस्कार भारती पलवल हरियाणा कविता सम्मान-पत्र है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक सुधार करते रहना है।

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