गुलिस्तां रहने दो महफूज

मदन मोहन शर्मा ‘सजल’ 
कोटा(राजस्थान)
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मत उजाड़ो प्यार के आशियां,
धरा पे बर्बादियां आ जाएगी
गुलिस्तां रहने दो महफूज,
दिलों में वीरानियां छा जाएगी।

कौन किसके होता करीब है,
सब वक्त-वक्त की ही बात है
जिंदगी है बस चार दिन की,
फिर लौटकर आती रात है।

गा लो प्यार के दो गीत,
मासूम दिलों में तनहाइयां हैं
कब गिर पड़े फूल डाली से,
हर तरफ ही रुसवाइयां हैं।

ऐसा जीना नहीं काम का,
आओ, नेह बीज संचार करें
जीवन धन्य सफल हो जाए,
मानवता को सब प्यार करेंll

परिचय-मदन मोहन शर्मा का साहित्यिक नाम  ‘सजल’ है। जन्मतिथि ११ जनवरी १९६० तथा जन्म स्थान कोटा(राजस्थान)है। आपका स्थाई पता कोटा स्थित आर. के.पुरम है। श्री शर्मा ने स्नात्तकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) की शिक्षा हासिल की और पेशे से व्याख्याता(निजी महाविद्यालय)का कार्यक्षेत्र है। आपकी लेखनी का उद्देश्य समाज में व्याप्त बुराइयों,आडम्बरों के खिलाफ सतत संघर्ष के लिए कलम उठाए रखना है। कलम के माध्यम से समाज में प्रेम, भाईचारा,सौहार्द कायम करना आपका प्रयास है। गीत,कविता,गज़ल,छन्द,दोहे, लेख,मुक्तक और लघुकथाएं आदि लेखन विधा है।

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