घमंडी मीन

रणदीप याज्ञिक ‘रण’ 
उरई(उत्तरप्रदेश)
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चला एक झुण्डकीट(कीड़े) रोज की भाँति ताल(तालाब) की ओर,
कोमल-सी काठ लार झिल्ली बदन से चिपकाए
जिसे देख रोज-रोज मी उनका रास्ता रोक उपहास उड़ाए।

बोली मीन-अरे ओ कीट,अधूरे क्यों रखे हो ये तन पर व्यर्थ बोझ,
झकाड़े लगता है अपने बदसूरत तन को मुझ सुन्दर रूपी मीन से हो छुपाते।

बोला वो कीट-अरे ओ नीर की मीन रानी,मेरी कुरूपता का यूँ नित-नित हास ना उड़ाओ,
और कृपा कर अपना यह तन इस मार्ग से हटाओ।

बोली फिर मीन उससे-आँख दिखाए मेरी सुन्दर काया का सारे जहाँ में डंका है,
और तेरा रास्ता रोककर मेरा खुद का समय बिगड़ता है।

सुनकर बोला कीट-अधूरा अपनी सुंदर रूप पर इठलाना अच्छी बात नहीं,
और फिर किसी का उपहास उड़ाना नेक काम नहीं।

तब मीन बोली गुस्से में झल्लाकर-अरे ओ कीट अधूरे,
मेरी सुन्दर काया से तू जलता है,
इस वजह से तू मुझको अखरता है,
इसलिए तेरा नाम लेने से मेरा दिन व्यर्थ गुजरता है।

जब गुजरे कुछ दिन तब सूर्य कुछ प्रचण्ड हुआ जिसने तालाब को सोख लिया,
तड़पने लगी वह मीन नीर के अभाव में और पुकार रही कोई तो बचाये मुझे इस संसार में।

सुनकर ये पुकार एक तितली उड़कर आई,जिसे देख मीन को राहत आई,
तितली के झुण्ड ने मछली को बड़े ताल में पहुँचाया ये उपकार देख मीन ने उनसे आभार जताया।

आभार जताकर बोली मीन-हे जग सुन्दर तितली रानी,
आपकी काया और करुणा की हुई मैं आभार सहित दीवानी…
अब बतलाओ तुम कौन हो और क्या है तुम्हारा नाम,
जिसे जपा करुँगी मैं दिन-रात बस इतनी सी है आस।

सुनकर बोली तितली रानी-क्यों मजाक करती हो नीर की मीन रानी,
मेरा नाम सुनकर तुम्हारा दिन व्यर्थ जायेगा,
क्योंकि हूँ मैं वही कीट अधूरा,
जिसका तूने उड़ाया नित-नित उपहास थाll

 

परिचयरणदीप कुमार याज्ञिक की जन्म तारीख १३ मई १९९५ है। साहित्यिक नाम `रण` से पहचाने जाने वाले श्री याज्ञिक वर्तमान में वाराणसी में हैं,जबकि स्थाई बसेरा उरई(जालौन)है। वर्तमान में एम.ए (द्वितीय वर्ष) के विद्यार्थी और कार्यक्षेत्र भी यही है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत अपने लेखन के माध्यम से विचारों का सम्प्रेषण करते हैं। इनकी लेखन विधा-गीत,कविता, कहानी और लेख है। प्रकाशन के तहत वर्तमान में कार्य(बुन्देखण्ड से संबंधित इतिहास पर)जारी हैl रण की लेखनी का उद्देश्य-समाज में व्याप्त रूढ़ियों को तोड़ना,अंधविश्वास को दूर करना, नागरिक बोध की समझ विकसित कराने के साथ-साथ निष्पक्ष सोच की मानसिकता को पैदा कराने का प्रयास है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-माता-पिता,शिक्षकगण तथा मित्रगण हैं।भाषा ज्ञान-हिन्दी,बुन्देलखण्डी एवं अंग्रेजी का रखते हैं। रुचि-लेखन,खेल और पुस्तकें पढ़ने में है।

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