चपला हिय 

प्रखर दीक्षित 
फर्रूखाबाद (उत्तर प्रदेश)
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सतत जो पास में रहता,वही दिल में  धड़कता है।
चपला हिय चमक उठती,जब पावस घन गरजता है॥
प्रणय रत्नाकर प्रणयी अथाह उल्लास युगलवर में,
उर्मियाँ ज्वार प्रणयन की दाम्पतिरस सरसता है॥

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