चार चाँद लगना

डॉ.नीलम कौर
उदयपुर (राजस्थान)
***************************************************
सूनी-सी धरा पर
जब कृषक हल चलते हैं,
लहलहाती खेती से
तब धरा पर चार चाँद लगते हैं।
स्वेद बहा जब मजदूरों का तब….
अट्टालिकाएँ बनतीं हैं,
मेहनत से उनकी ही
शहरों की रौनक बनती है।
कर्मकारक के श्रम से ही
सृष्टा की सृष्टि चलती है,
मेहनत और मशक्कत से
ही तो मंजिल मिलती है।
कलम सिपाही की कलम
से मोती जब गिरते हैं,
धवल सफों पर तब ही
 इतिहास सजते हैं॥
परिचय – डॉ.नीलम कौर राजस्थान राज्य के उदयपुर में रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। आपका उपनाम ‘नील’ है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। आपका निवास स्थल अजमेर स्थित जौंस गंज है।  सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। अन्य सामाजिक संस्थाओं में भी जुड़ाव व सदस्यता है। आपकी विधा-अतुकांत कविता,अकविता,आशुकाव्य और उन्मुक्त आदि है। आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना और भावनाओं के ज्वार को शब्दों में प्रवाह करना ही लिखने क उद्देश्य है।

Hits: 23

आपकी प्रतिक्रिया दें.