चिड़िया

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’
पंडरिया (छत्तीसगढ़)
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चींव-चींव करती चिड़िया रानी,
छत पर रोज है आती।
ची-ची ची-ची करते-करते,
दाने को है खाती।
आसमान की सैर करके,
बड़े मजे से आती।
पंख फैलाकर चिड़िया रानी,
फुदक-फुदक कर गाती।
शाम सबेरे घर में आती,
अपना गीत सुनाती
छोटे-छोटे बच्चों को लेकर,
फुर्र से है उड़ जाती

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