चीन जैसे देशों का बहिष्कार जरुरी

संजय जैन 
मुम्बई(महाराष्ट्र)

************************************************

दोस्तों,आज हमारा देश जिस दौर से गुजर रहा है उस सब के जिम्मेदार भी हम सभी लोग हैं। यदि समय रहते पहले से ही हम और आप सतर्क हो जाते तो शायद हमें आज ये दिन देखने को नहीं मिलते। पहले तो  हम लोग सस्ते सामान समझकर बहुत खरीदारी करते रहे और अब एक दम से बंद करने को आ रहे हैं। इस बात का हमें पहले भी पता था कि,चीन हमेशा ही भारत विरोधी रहा है और पकिस्तान की कभी सीधी तो कभी दूसरों द्वारा उसका सहयोग किया जाता रहा है। जब पानी आज सर के ऊपर से बहने लगा,तब हम लोग जग रहे हैं। यदि बनियाई बुध्दि से हम उसके पर कतरें तो दोनों ही काम बड़ी आसानी के साथ हो जाएंगे,यानी साँप का साँप मर जाए और हमारी लाठी भी न टूटे। किसी को भी यदि कमजोर करना हो तो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी पर हमें वार करना चाहिए, वैसे ही आजकल चीन की वित्तीय स्थिति सही नहीं है। चीन की कुल पूंजी में भारत का ३५-४० फीसदी योगदान है। यदि हम उसके सामान आदि का बहिष्कार करना प्रारम्भ कर दें तो,वो दिन दूर नहीं कि चीन को भारत के सामने झुकना पड़ेगा। यही हाल अमेरिका का भी है।  विश्व में सबसे ज्यादा खुदरा व्यापारी सिर्फ हिंदुस्तान में ही हैं। हम चीन को सिर्फ १०-१२ प्रतिशत ही निर्यात करते हैं, और चीन हमें कितना निर्यात करता है,ये बात सोचने योग्य है ? हमारे ही पैसे से हमें ही हानि पहुँचा रहा है। अब सभी देशवासियों को सच्चाई का पता चल गया है,तो हमें प्रतिज्ञा करना चाहिए कि हम आज से स्वदेशी वस्तु ही खरीदेंगे,ताकि देश का पैसा देश में ही रहे। वैसे भी चीन को हिंदुस्तान में उसके सामान की उपेक्षा हजम नहीं हो रही है,इसलिए बौख़लाहट में कुछ भी बके जा रहा है। बोल रहा है कि,उसे हमारे सामानों को निश्चित ही खरीदना पड़ेगा। ऐसे में अब हम सब भारतीयों का परम कर्तव्य बनता है कि हम वो करके दिखाएं,जो दिन जापान ने अमेरिका को दिखा दिए थे। सभी को पता होगा कि, किसी को भी यदि तोड़ना है तो सबसे पहले उस देश की वित्तीय स्थिति को इतना ज्यादा कमजोर कर दो कि, भविष्य में हिंदुस्तान के सामने सिर न उठा सके। इसके लिए देश की जनता को बहुत बड़ी चुनौती चीन जैसे देशों के सामने उत्पन्न कर देना चाहिए,वो भी कैसे-उसके  सामान का बहिष्कार करके। दो पैसे अपने ही देश के  निर्माताओं को दो,भले ही वो चीन की कीमत से थोड़ा ज्यादा ही क्यों न हो। यदि हम १२० करोड़ लोग एक मत से ठान लें, तो अच्छे से अच्छे देश की नींव को हिलाकर रख सकते हैं। आइए, इस बार हम सभी भारतीय एक शपथ लें कि जो भी देश हिंदुस्तान के खिलाफ जहर उगल रहा है,और आतकंवादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए दूसरों की मदद कर रहा है,उस देश का और उस देश से आने वाले सभी वस्तुओं  का विरोध करें। देश के व्यापारियों से भी अनुरोध है कि वो भी देश हित में उचित कदम उठाएं  और भारत की स्वंत्रता को आगे भी बनाएं रखें,ताकि हमारे देशभक्तों की कुर्बानियां बेकार न जाएं। स्वदेशी वस्तुओ को अपनाएं और अपने देशभक्त होने का परिचय दें। इस देश के लिए जो शहीद हुए हैं,उनकी वीरता को सिर झुकाकर सलाम..।
परिचय-संजय जैन बीना (जिला सागर, मध्यप्रदेश) के रहने वाले हैं। वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। आपकी जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६५ और जन्मस्थल भी बीना ही है। करीब २५ साल से बम्बई में निजी संस्थान में व्यवसायिक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। आपकी शिक्षा वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ ही निर्यात प्रबंधन की भी शैक्षणिक योग्यता है। संजय जैन को बचपन से ही लिखना-पढ़ने का बहुत शौक था,इसलिए लेखन में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अपनी लेखनी का कमाल कई मंचों पर भी दिखाने के करण कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इनको सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के एक प्रसिद्ध अखबार में ब्लॉग भी लिखते हैं। लिखने के शौक के कारण आप सामाजिक गतिविधियों और संस्थाओं में भी हमेशा सक्रिय हैं। लिखने का उद्देश्य मन का शौक और हिंदी को प्रचारित करना है।

Hits: 43

आपकी प्रतिक्रिया दें.