चूड़ियां

डॉ.नीलम कौर
उदयपुर (राजस्थान)
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वक्त की रेत पर नहीं,
इतिहास के स्वर्णिम /काले पन्नों पर
बिखरे हैं कई टूटी चूड़ियों,
के टुकड़े।
कुछ टुकड़े सिसक रहे,
बेबसी पर अपनी
सजी कलाईयों में तो,
श्रृंगार सुंदरी का बनकर।
पर वहशी दरिंदों ने,
हवस की कुत्सित
पूर्ति में,
मरोड़ कलाई तोड़ दीं।
बख्शी तो नहीं गई,
नन्हीं कलाईयों में
सजी मनमोहती,
मुस्कराती चूड़ी भी।
सजी जो गोरी हाथ में,
सुहाग बनकर
सरहद की मांग पर,
वो भी कुर्बान गई।
पर कुछ चूड़ियों की खनक,
कोमलांगिनी कलाईयों में नहीं
सुनाई देती है शमशीर की,
टकराहट में।
साज-ए-मोहब्बत में,
गुनगुनाई थी कभी
मांग धरा की जब हुई,
थाम हाथ में तेग आल्हा राग गा गई॥
परिचय – डॉ.नीलम कौर राजस्थान राज्य के उदयपुर में रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। आपका उपनाम ‘नील’ है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। आपका निवास स्थल अजमेर स्थित जौंस गंज है।  सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। अन्य सामाजिक संस्थाओं में भी जुड़ाव व सदस्यता है। आपकी विधा-अतुकांत कविता,अकविता,आशुकाव्य और उन्मुक्त आदि है। आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना और भावनाओं के ज्वार को शब्दों में प्रवाह करना ही लिखने क उद्देश्य है।

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