छुअन

डॉ.सोना सिंह 
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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कर दिया इंकार
सिर्फ एक डर से,
कोई देख न लें
हमारे साथ बैठने को,
नजर न लग जाए
हमारे प्यार को,
कॉफी पियोगी ?
पर गर्दन हिली इंकार में,
मुंह से ‘टच’ आवाज भी निकली
पर यह कुछ भी न था,
सिवाय इसके
देख न ले कोई कि,
चप्पल टूटने वाली थी उसकी।
बाकी
माता-पिता खुश हैं।
प्रेमी पति बन गया,
एक बेटी को जन्मकर
माँ बन गई।
पर वह अब भी सोफे पर लेटकर
कभी बिस्तर पर बैठकर,
कतरती है नाखून दांतों से
कुछ है ऐसा बाकी,
जिसे करने की
बेताबी बाकी है॥

परिचय-डॉ.सोना सिंह का बसेरा मध्यप्रदेश के इंदौर में हैl संप्रति से आप देवी अहिल्या विश्वविद्यालय,इन्दौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में व्याख्याताके रूप में कार्यरत हैंl यहां विभागाध्यक्ष रही डॉ.सिंह की रचनाओं का इंदौर से दिल्ली तक की पत्रिकाओं एवं दैनिक पत्रों में समय-समय पर आलेख,कविता तथा शोध पत्रों के रूप में प्रकाशन हो चुका है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के भारतेन्दु हरिशचंद्र राष्ट्रीय पुरस्कार से आप सम्मानित (पुस्तक-विकास संचार एवं अवधारणाएँ) हैं। आपने यूनीसेफ के लिए पुस्तक `जिंदगी जिंदाबाद` का सम्पादन भी किया है। व्यवहारिक और प्रायोगिक पत्रकारिता की पक्षधर डॉ.सिंह के ४० से अधिक शोध पत्रों का प्रकाशन,२०० समीक्षा आलेख तथा ५ पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन हुआ है। जीवन की अनुभूतियों सहित प्रेम,सौंदर्य को देखना,उन सभी को पाठकों तक पहुंचाना और अपने स्तर पर साहित्य और भाषा की सेवा करना ही आपकी लेखनी का उद्देश्य है।

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