जनजागृति से  रखना होगा पर्यावरण सुरक्षित  

निशा गुप्ता 
देहरादून (उत्तराखंड)

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पर्यावरण दिवस विशेष…………………….
हर साल ५ जून `विश्व पर्यावरण दिवस` के रूप में मनाया  जाता है,विचारणीय प्रश्न ये उठता है कि संसार में ऐसी विकट स्थिति कैसे और क्यों बन रही है कि आज हम जीवन के जो आधार हैं,उन्हीं पर जागृति दिवस मनाने पर बाध्य हैं और आने वाली संतति को वो दिवस मनाकर चेता रहे हैं कि,जिंदा रहना है तो बचाओ अपने ही जीवन के आधार को,चाहे वो धरती,जल,वायु,आकाश हो जिससे पर्यावरण बनता है।
क्या ये समस्या सिर्फ बातों से-गोष्ठियों से ही सुलझ जाएंगी,नहीं इसके लिए सार्थक कदम उठाने होंगेl प्रण लेना होगा कि,घर के सदस्यों के जन्मदिवस,शादी की सालगिरह,और मृत्यु पर पेड़ लगाएंगे और उनकी पालना करेंगेl  
पानी को व्यर्थ न जाने देंगे,बिजली जरूरत पर ही उपयोग करेंगे,अपने खेतों में,क्यारियों में बिन बात रसायन का उपयोग नहीं करेंगे। जहां तक संभव हो,गोबर की खाद का उपयोग करेंगे।
               विकास की अंधी दौड़ में चलते हमारे पूर्वज और बेहताशा भागते हमने अगर इसे सोचने के साथ-साथ क्रियान्वित भी किया होता तो,शायद हमें ये दिवस न मनाने पड़ते,पर `देर आए दुरुस्त आए` को समझकर अभी भी समय से अगर मिलकर इस कार्य को एक जरूरत के तौर पर किया जाए तो आने वाली पीढ़ी को थोड़ा बेहतर संसार दे पाएंगेl हमें सोचना ही होगा कि हम अपने आने वाले बच्चों को कैसा संसार देकर जा रहे हैं। विकास करना जीवन की जरूरत है,पर अगर जीवन ही खतरे में हो तो ऐसे विकास का क्या मतलब है ? जीने के लिए शुद्ध जल,वायु और पर्यावरण चाहिए ही तो कहीं-न-कहीं इस अंधे विकास को थोड़ा विराम देना होगा,अगर अपनी आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ देखना है। रसायन के इस्तेमाल पर खुद ही रोक लगानी होगीl प्लास्टिक का उपयोग कम-से-कम करें,व जब भी किसी सामूहिक जगह पर जाएं तो उसकी चर्चा जरूर करेंl कोशिश रहे कि धीरे-धीरे इसे अपनी जिंदगी से निकाल बाहर करेंl कठिन कार्य है,पर नामुमकिन नहीं हैl सामाजिक चेतना तभी आएगी,जब आप और हम कोशिश करेंगे। बहुत-सी असाध्य बीमारियों से अपने को, अपने परिवार तथा अपने समाज को हमें मिलकर ही बचाना होगा। पेड़-पौधों को अपने जीवन में विशेष महत्व देना होगाl सब संकल्प लें कि,शादी,जन्मदिन व अपने आत्मीय की मृत्यु पर उसकी याद को चिरस्थाई बनाने के लिए एक पेड़ जरूर लगाएंगे,तथा पेड़-पौधों का पूरा संरक्षण करेंगे
परिचय-निशा गुप्ता की जन्मतिथि १३ जुलाई १९६२ तथा जन्म स्थान मुज़फ्फरनगर है। आपका निवास देहरादून में विष्णु रोड पर है। उत्तराखंड राज्य की निशा जी ने अकार्बनिक रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर किया है। कार्यक्षेत्र में गृह स्वामिनी होकर भी आप सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत श्रवण बाधित संस्था की प्रांतीय महिला प्रमुख हैं,तो महिला सभा सहित अन्य संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। आप विषय विशेषज्ञ के तौर पर शालाओं में नशा मुक्ति पर भी कार्य करती हैं। लेखन विधा में कविता लिखती हैं पर मानना है कि,जो मनोभाव मेरे मन में आए,वही उकेरे जाने चाहिए। निशा जी की कविताएं, लेख,और कहानी(सामयिक विषयों पर स्थानीय सहित प्रदेश के अखबारों में भी छपी हैं। प्राप्त सम्मान की बात करें तो श्रेष्ठ कवियित्री सम्मान,विश्व हिंदी रचनाकार मंच, आदि हैं। कवि सम्मेलनों में राष्ट्रीय कवियों के साथ कविता पाठ भी कर चुकी हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य- मनोभावों को सूत्र में पिरोकर सबको जागरुक करना, हिंदी के उत्कृष्ट महानुभावों से कुछ सीखना और भाषा को प्रचारित करना है।

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