जब सम बल की लड़ाई होती

डॉ. सुरेश जी. पत्तार ‘सौरभ
बागलकोट (कर्नाटक) 
*************************************************************************
कभी-कभी समय बहुत सिखाता,
इक क्षण भूल गए तो सिसकाता।
चाहे दरार दिल हो या मिले दिल,
जरूर उर नर का बहुत सताता॥
गुलाब कहाँ-कहाँ चढ़ाया जाता,
कांटे को कभी नहीं पता चलता।
सिर्फ गुलाब का पहरेदार बन के,
भगवान दिया जिम्मा निभाता॥
दिल भी अजीब पहरेदार अपना,
चुभकर बंद करा देता है हंसना।
छटेंद्रीय शक्ति का सदुपयोग कर,
छानत सदा बुद्धि का झूठ सपना॥
दिल और दिमाग की जोर लड़ाई,
जब-जब सम बल लड़ाई हो पाई।
मन,बुद्धि कीचड़ में डूब जा के,
मात्र कर पैर चलाते,न औ कोई॥
परिचय- डॉ.सुरेश जी. पत्तार का उपनाम ‘सौरभ’ हैl इनका निवास बागलकोट (राज्य कर्नाटक) में और यही स्थाई है। आपका जन्म कर्नाटक में ही ४ जून १९७९ का हैl आपकी शिक्षा एम.ए.,बी.एड., एम.फिल. सहित पी.एच-डी.भी है। आपका कार्यक्षेत्र मूलतः सरकारी अध्यापक(हिन्दी) का हैl आपको कविता,कहानी एवं आलेख लिखने का शौक है। `नागार्जुन के काव्य में शोषित वर्ग`विषय पर आपने लघु शोध प्रबंध तैयार किया है तो कई पत्रिकाओं में आलेख,कविताएँ तथा कहानी प्रकाशित हो चुकी है।

Hits: 31

आपकी प्रतिक्रिया दें.