जरा याद करो अपना बालपन

वीरेन्द्र कुमार साहू
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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मां! आज क्यों इतनी दुखी है,
मुस्कराता चेहरा क्यों? रूखा है।
क्या ग़मों का है कोई  बादल,
फिर भीगा क्यूं मां का आंचल ?
तड़प रही है अकेली पल हरपल,
बंधा दे उन्हें कोई ढांढस का बल।
देख दशा मां की मौन कैसा मन,
जरा याद करो अपना बालपन।
ये वही है जिनकी सांस तेरे लिए,
अलख को किया अरदास तेरे लिए।
कामना की,हर प्रयास तेरे लिए ,
उनको बस एक आस तेरे लिए।
पर उनका हर बोल क्यूं ? लगता,
बेफिजूल और बकवास तेरे लिए।
मत चला! मां पर जुबानी कृपन,
जरा याद करो अपना बालपन॥

परिचय-वीरेन्द्र कुमार साहू का जन्म १५ दिसम्बर १९८७ को बोड़राबांधा (राजिम) में हुआ हैl आपका वर्तमान निवास ग्राम-बोड़राबांधा,पोड़(पाण्डुका),जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़)हैl यही स्थाई निवास भी हैl छत्तीसगढ़ राज्य के श्री साहू ने एम.ए.(हिन्दी) और डी.पी.ई. की शिक्षा प्राप्त की हैl आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत स्वयं के समाज में सेवी हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,कविता हैl ब्लॉग पर भी सक्रिय लेखन करते हैंl वीरेंद्र साहू की लेखनी का उद्देश्य-भावों की अभिव्यक्ति से नवजागरण करना हैl 

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