जलाते हैं रात में…

सुदामा दुबे 
सीहोर(मध्यप्रदेश)

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आओ चराग़ दिल के जलाते हैं रात में,
आ प्यार की महफिल को सजाते हैं रात में।
इस मदभरे मौसम में सनम छेड़ कोई  गीत,
आ मिलन का कोई साज बजाते हैं रात में।
छूटे नहीं कभी भी सनम साथ हमारा,
इस बात की कसम हम खाते हैं रात में।
दूरी न रहे कोई हमारे दरमियां,
कुछ इस तरह से दोनों मिलते हैं रात  में।
दिल की बात दिल में रखना नहीं  कभी।
आ दिल को दिल की बात सुनाते हैं रात में॥
परिचय: सुदामा दुबे की की जन्मतिथि ११ फरवरी १९७५ हैl आपकी शिक्षा एम.ए.(राजनीति शास्त्र)है l सहायक अध्यापक के रूप में आप कार्यरत हैं l श्री दुबे का निवास सीहोर(मध्यप्रदेश) जिले के बाबरी (तहसील रेहटी)में है। आप बतौर कवि काव्य पाठ भी करते हैं। लेखन में कविता,गीत,मुक्तक और छंद आदि रचते हैंl

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