जांच…यानी जा-आंच=जांच

सुनील जैन `राही`
पालम गांव(नई दिल्ली)

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जांच प्रधान देश में स्‍वागत है। देश कृषि प्रधान हुआ करता था,अब जांच प्रधान हो गया है। जांच की फसल,हर मौसम में होती है। इस फसल के लिए पानी और खाद की आवश्‍यकता नहीं होती। जांच की फसल के लिए आवश्‍यक तत्‍व-
-फंसाना हो
-बचाना हो
-काम नहीं होने देना हो
-विरोध करना हो

जांच स्‍वतंत्र नहीं होती,जांच स्‍वतंत्र होगी तो निष्‍पक्ष भी होगी।
देश में जांच और चुनाव की फसल अन्‍य फसलों से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है। देश में जितने लोग नहीं है,उससे ज्‍यादा जांच चल रही है। मौसम कैसा भी हो,जांच की फसल खराब नहीं होती। सूखा पड़े या बाढ़ आए,जांच की फसल के लिए हर मौसम अनुकूल है। मौसम विभाग की भविष्‍यवाणी का असर जांच पर नहीं पड़ता।
देश में दो फसल किसी भी मौसम में उगा सकते हैं-जांच और चुनाव की फसल। चुनाव और जांच में पता नहीं,कौन-सा रिश्‍ता है,जो टूटता ही नहीं। चुनाव आते ही जांच शुरू,चुनाव जाते ही जांच शुरू।
देश जांच का कारखाना है। इसका उत्‍पादन निरन्‍तर होता है। इसकी खपत प्‍याज की तरह है। प्‍याज से सत्‍ता बदल जाती है, जांच से भी सत्‍ता बदली जा सकती है। जांच पर निर्भर करता है वह किस स्‍तर की है।
जांच की चुनाव में नेताओं की तरह-धार्मिक जुलूस में भक्‍तों की तरह और तो और कोई मर गया तो जांच,कैसे मर गया जांच, मकान बनाया जांच,शादी की तो जांच,शादी नहीं की तो जांच, शादी के पहले जांच,नौकरी की जांच,थाने में लफड़े की जांच, लड़की और लड़के के दोस्‍तों और दोस्‍तनियों की जांच। परियोजना में चूने की जांच,बिल्‍ली ने छींक दिया-जांच,कुत्ता भौंका तो जांच।
गरीब को रोटी नहीं,गरीब का पेट पीठ से चिपक गया,झोपड़ी जल गई,झोपड़ी पर बुल्‍डोजर चल गया,पानी का टैंकर सप्‍ताह में नहीं आया,कोई जांच नहीं। इसकी भी जांच होनी चाहिए। जांच उसी की होती है,जिसमें नामा (पैसा) मिलता है।
जांच के अनेक अवसर हैं। मुहल्‍ले की इज्‍जत भागी-जांच, पुलिस समय पर नहीं पहुंची जांच,लड़के साथ या अकेली भागी या चली गई जांच,इज्‍जत कौन-से दल की थी,जांच। आखिरी बार किसकी इज्‍जत भागी,इज्‍जत ही क्‍यों भागती है,कोई दूसरा क्‍यों नहीं भागता। गरीब की इज्‍जत ही हर बार क्‍यों भागती है ? अमीर की इज्‍जत कितनी बार भागी-लेकिन जांच नहीं।
खैर,जो भी हो जांच होनी चाहिए। जांच होना राष्‍ट्रीय विकास का प्रतीक है। जांच तभी होती है,जब विकास होता है। विकास जांच के दायरे में आता है। पार्टी फण्‍ड विकास,नेताजी के बैंक बेलेन्‍स का विकास,अफसर के पेट का विकास,बाबू की मूंछ का विकास,ये सभी उस समय दायरे में आते हैं,जब कोई इनका विरोध करता है। विरोध का दूसरा नाम जांच भी है। जांच का विस्‍तार सीमा विस्‍तार की तरह होता हैl आप इसका चौतरफा विस्‍तार कर सकते हैं।
आनन्‍द की बात है। इस देश में जांच की जांच के लिए उप जांच समिति बनाई जाती है। चुनाव चल रहे हैं,होते ही रहते हैं। परिणाम आते हैं आते ही रहते हैं,दारू की दुकान पर दोनों होते हैं, हारने वाले भी और जीतने वाले भी। चुनाव में रात का समय विश्राम का माना जाता है। दस-बीस नेताओं का दल विश्राम की मुद्रा में यत्र-तत्र पड़ा हुआ था। एक नेता को पीकन की हुड़क लगी। उन्‍होंने पास वाले नेता के कुर्ते की जेब में पीक दिया। दूसरे दिन से जांच शुरू। जांच तो जांच है,जांच का अध्‍यक्ष भी होता है। अध्‍यक्ष उसे ही बनाया जाता है जो या तो दोषी हो या सबसे ज्‍यादा बदमाश।
देश में जांच सीवर के पानी की तरह फैली पड़ी है। सफाई अभियान भी चल रहा है,जांच भी चल रही है। जांच चलने से देश का चलना प्रतीत होता है। देश के सर्वांगीण विकास के लिए जांच होना जरूरी है। जैसे प्रजातंत्र में प्रजा हो या न हो,सड़ा हुआ तंत्र होना जरूरी है। सड़ा तंत्र जांच का प्रतीक है और जांच विकास का।

परिचय-आपका जन्म स्थान पाढ़म(जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद)तथा जन्म तारीख २९ सितम्बर है।सुनील जैन का उपनाम `राही` है,और हिन्दी सहित मराठी,गुजराती(कार्यसाधक ज्ञान)भाषा भी जानते हैं।बी.कॉम.की शिक्षा खरगोन(मध्यप्रदेश)से तथा एम.ए.(हिन्दी,मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया है। पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन खाते में-व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी है।आपकी कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में लेखनी का प्रकाशन होने के साथ आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। राही ने बाबा साहेब आम्बेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया है। मराठी के दो धारावाहिकों सहित करीब १२ आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं,रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ४५ से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वविद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैं। कुछ अखबारों में नियमित व्यंग्य लेखन करते हैं। एक व्यंग्य संग्रह अभी प्रकाशनाधीन हैl नई दिल्ली प्रदेश के निवासी श्री जैन सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रीय है| व्यंग्य प्रमुख है,जबकि बाल कहानियां और कविताएं भी लिखते हैंl आप ब्लॉग पर भी लिखते हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य-पीड़ा देखना,महसूस करना और व्यक्त कर देना है।

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