जाने क्यों हर कोई

कैलाश भावसार 
बड़ौद (मध्यप्रदेश)
*************************************************
जाने क्यों हर कोई मुझको छलता रहा,
जान कर अपनी किस्मत मैं चलता रहा।
फिर उजाले की उम्मीद हर बार थी,
दीप बनकर अकेला ही जलता रहा।
रास्ते में मिले यार दुश्मन भी थे,
सबसे हँसकर गले से ही मिलता रहा।
आएगी एक सुबह बाद हर रात के,
सोचकर शाम तक यूँ ही ढलता रहा।
हर कोई अपनी धुन में है खोया हुआ,
राग जीवन के मैं भी बदलता रहा॥
परिचय-कैलाश भावसार का जन्म स्थान जीरापुर एवं जन्मतिथि ५ सितम्बर हैl वर्तमान में आपका निवास बड़ौद (जिला आगर मालवा),म.प्र.हैl मध्यप्रदेश के श्री भावसार ने एम.एस-सी. तथा बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की हैl कार्यक्षेत्र में अध्यापक होने के साथ ही सामाजिक गतिविधि के निमित्त सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि में सक्रिय रहते हैंl आपकी लेखन विधा में गीत तथा कविता हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक जागरुकता बढ़ाने के साथ ही आनंद हासिल करना हैl

Hits: 18

आपकी प्रतिक्रिया दें.