जिंदगी तुझको बुलाती है

मनोज जैन ‘मधुर’
शिवपुरी (मध्यप्रदेश)
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मुस्करा रे
मन!
हैं अभी भी सौ
बहाने,
जिंदगी तुझको बुलाती है।
आसमान की तरफ
उठाकर हाथ,
गिलहरी गाएगी ही।
चिड़िया भी नन्हें बच्चों को
चुग्गा लेकर,
आएगी ही।
अंधियारा
चाहे कितने भी अपने लम्बे
पैर पसारे,
नन्हीं किरणों के
उजास से
मानवता,
मुस्काएगी ही।
गुन-गुना रे
मन!
हैं अभी भी
सौ तराने हैं,
जिंदगी तुझको बुलाती है।
बदली घिरकर
आसमान से,
मीठा जल बरसाती तो है।
मद में होकर मस्त
टिटहरी प्यारा,
गाना गाती तो है।
क्षिति जल पावक
गगन समीरन ने तो,
रूप नहीं बदला है
फूलों का रस लेने,
तितली बागों
में भी जाती तो है।
मान जा रे
मन !
मीत आए
हैं मनाने
जिंदगी तुझको बुलाती है।
परिचय-मनोज जैन का जन्म २५ दिसम्बर १९७५ का है। आपका निवास ग्राम-बामौरकलां(शिवपुरी, (म.प्र.)है। उपनाम ‘मधुर’ लगाते हैं। आप फिलहाल मध्यप्रदेश की इन्दिरा कॉलोनी(बाग़ उमराव दूल्हा)भोपाल में रहते हैं। पेशे से निजी संस्थान में क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक श्री जैन ने अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा पाई है। आपकी प्रकाशित कृति-‘एक बूँद हम'(गीत संग्रह),’काव्य अमृत'(साझा काव्य संग्रह)सहित अन्य है। विविध प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का नियमित प्रकाशन होता रहता है। दूरदर्शन व आकाशवाणी से भी रचनाएँ प्रसारित हुई हैं। संकलित प्रकाशन में ‘धार पर हम-२’, ‘नवगीत नई दस्तकें’ एवं ‘नवगीत के नए प्रतिमान’ (शोध सन्दर्भ ग्रन्थ)आदि प्रमुख हैं। दो गीत संग्रह,पुष्पगिरि खण्डकाव्य सहित बाल कविताओं का संग्रह तथा एक दोहा संग्रह प्रकाशनाधीन है। आपको मिले १५ सम्मानों में खास मध्यप्रदेश के राज्यपाल द्वारा सार्वजनिक नागरिक सम्मान (२००९),शिरढोणकर स्मृति सम्मान,म. प्र. लेखक संघ का रामपूजन मलिक नवोदित गीतकार-प्रथम पुरस्कार (२०१०) और अभा भाषा साहित्य सम्मेलन का साहित्यसेवी सम्मान, २०१७ में ‘अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान’ और राष्ट्रीय नटवर गीतकार सम्मान आदि हैं।

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