जीवन का सर्वांगीण विकास श्रीकृष्ण के उपदेशों में

सत्यम सिंह बघेल
लखनऊ (उत्तरप्रदेश)

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जीवन का सर्वांगीण विकास हम भगवान श्री कृष्ण में पाते हैं। कर्म और योग, राजनीति और धर्म,अध्यात्म और समाज-विज्ञान समस्त क्षेत्रों में श्री कृष्ण को हम एक विशेषज्ञ रूप में देखते हैं,किन्तु हम भारतवासी आज तक भगवान कृष्ण के चरित्र को समझने में असमर्थ रहे हैं। लोकनीति अध्यात्म को समन्वय के सूत्र में गूँथकर ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का पाँचजन्य फूंकने वाले कृष्ण ही हैं।
श्री कृष्ण केवल योद्धा राजनीतिज्ञ, अध्यात्मवादी योगी और समाज-सुधारक ही नहीं थे,बल्कि वे एक उच्च कोटि के प्रेरक गुरु भी थे। श्री कृष्ण की प्रेरणात्मक एवं आध्यात्मिक शिक्षाओं का परिचय हमें गीता द्वारा मिलता है। आत्मा की अमरता और पुनर्जन्म,ज्ञान और कर्म का समन्वय,स्थित प्रज्ञ मनुष्यों के लक्षण,वर्ण व्यवस्था आदि-आदि विषयों पर सांगोपांग विचार यदि हम देखना चाहें तो हमें गीता का अध्ययन करना चाहिए। गीता को यदि भारतीय धर्म का विश्वकोष कहें,तो कोई अत्युक्ति नहीं होगी। गीता में ही श्री कृष्ण का वास्तविक चरित्र प्रस्फुटित हुआ है। गीता के कृष्ण हमारे सामने जगद्गुरु के रूप में आते हैं। ‘नैनं छिन्दान्त शस्त्राणि’ द्वारा आत्मा की अमरता को बताते हुए कृष्ण हमें कर्म करने को प्रेरित करते हैं। कृष्ण ने न केवल भारत राष्ट्र की अखण्डता की ही रक्षा की,बल्कि उन्होंने समाज को भी नई दिशा दिखाई और मनुष्य जीवन को दुःख का पर्याय नहीं माना,बल्कि संसार को वास्तविक कर्मभूमि बतलाया है,फल की आशा छोड़कर निष्काम कर्म करना ही सच्चा योग है। आज श्रीकृष्ण की शिक्षा एवं उनके चरित्र का आज के युग में अधिक से अधिक पठन और मनन करना आवश्यक है। न केवल मनन ही,बल्कि उनकी शिक्षा के अनुसार चलने का प्रयत्न भी करना चाहिए।

परिचय-सत्यम सिंह बघेल का जन्म ५ अप्रैल १९९० को सिवनी (म.प्र.)में हुआ है। निवास लखनऊ (उ.प्र.)में है। स्नातक (कम्प्यूटर विज्ञान) तक शिक्षित श्री बघेल की लेखन विधा-आलेख(विशेष रूप से संपादकीय लेख), कविता तथा लघुकथा है। कईं अखबारों, वेब पोर्टल और स्मारिका में भी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। १५ से अधिक पुस्तकों (कविता,लघुकथा,लेख,संस्मरण आदि साझा संकलनों) का सम्पादन भी कर चुके हैं। बतौर सम्प्रति फिलहाल आप एक प्रकाशन में संस्थापक, प्रकाशक,प्रबन्धक होने के साथ ही प्रेरणादायक वक्ता भी हैं। 

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