जीवन की परिभाषा

अनन्तराम चौबे ‘अनन्त’
जबलपुर(मध्यप्रदेश)
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जीवन की परिभाषा है,
आशा उमंग अभिलाषा है।
सुख-दुःख साथ में रहते हैं,
कभी छलकती घोर निराशा।
जीवन है अनमोल कभी,
भी मोल नहीं हो सकता है।
जीना है हिल-मिल कर जीना,
सुख-दुःख में है साथ निभाना।
सुख में हंसना दुःख में रोना,
सच्चाई के साथ में रहना।
पाप-पुण्य के अन्तर को,
हमेशा दिल में याद रखना।
झूठ फरेब पाप जो करता,
पहले खूब फलता-फूलता।
जीवन में जब ठोकर लगती,
पुण्य की नैया पार लगाती।
सच-सच्चाई साथ हमेशा,
अच्छी राह दिखाती है।
जीवन की परिभाषा में
यही तो बिगड़े काम बनाती।
बचपन और जवानी में,
राह सही जो समझ न पाया।
कभी सुबह कभी शाम है,
जीवन भर वो पछताया।
मुश्किल जब भी आती है,
ईश्वर की याद ही आती है।
जीवन की परिभाषा में,
आशा और निराशा है।
कभी धूप है कभी छांव है,
ऐसा जीवन का मुकाम है॥

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