जीवन युद्ध

सुरेश जजावरा ‘सुरेश सरल’
छिंदवाड़ा(मध्यप्रदेश)
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जो समर भूमि में रखा कदम,
तू काँप मत यहाँ थर-थरl
लड़कर ही विजय को पाएगा,
तू युद्ध कर-तू युद्ध करll

चीर दे तू छातियां,
सिंह-सी दहाड़ कर
जलाकर सबको राख करl
तू भुजंग-सी फुंकार कर,
तू युद्ध कर-तू युद्ध करll

खड़क तेरी तड़प रही,
रक्त की तलब लगी
रणचंडी की माला बुनl
तू मुंड-मुंड काट कर,
तू युद्ध कर-तू युद्ध करll

रौंद कर तू आगे बढ़,
अधकटे तड़पते तन
पहाड़ को बिखेर देl
तू ऐसी हुंकार भर,
तू युद्ध कर-तू युद्ध करll

खेल तू होलियाँ,
दुश्मनों के रक्त से
इस युद्ध क्षेत्र कोl
तू लहूलुहान कर,
तू युद्ध कर-तू युद्ध करll

वार पर वार कर,
कि आह ना निकल सकेl
मृत्यु के चीत्कार को,
तू मधुर संगीत कर
तू युद्ध कर-तु युद्ध करll

दहाड़ को गीत कर,
तलवार को स्वरांजलीl
चीखना,कराहना और
रूदन को वाद्य यंत्र कर,
तू युद्ध कर-तू युद्ध करll

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