जोकर

वाणी बरठाकुर ‘विभा’
तेजपुर(असम)
*************************************************************
     “रिया,आज स्कूल में होमवर्क दिया है या नहीं ?” अनन्या अपनी बेटी से पूछती है। रिया झट से बैग में से पुस्तक निकलकर कहती है,-“हाँ माँ।” जोकर की तस्वीर दिखाती हुई,-“माँ, देखो,मैम ने इस जोकर की छवि बनाकर उसके ऊपर पाँच वाक्य लिखकर ले जाने के लिए कहा है। माँ, ड्राइंग मैं बना लूंगी,लेकिन जोकर के बारे में पाँच लाइन आप लिख देंगी न !”
“हाँ बिल्कुल लिख दूंगी,” कहकर अनन्या घर के काम निपटाने लगती है।
      सासू माँ के कपड़े धोते-धोते सोच रही है,-‘”जोकर अपना हर दर्द छिपाकर लोगों को हँसाता है। मेरी जिंदगी भी जोकर की तरह ही बन गई है। सासू माँ जबसे बीमार पड़ी हैं,तब से उनकी साफ-सफाई,फिर ससुर जी, देवर जी और पति की ख्वाहिशों के पकवान बनाकर देना। रिया तो अब आठ साल की है,उसकी तो देखभाल करनी है ही। कभी किसी के साथ गम नही बाँट सकती हूँ,सबको हँस-हँसकर खिलाती-पिलाती हूँ। कभी मन उदास रहा तो सबकी गाली सुननी पड़ती है कि कहीं मैं सबसे नाराज हूँ,काम करने के कारण मुँह फुलाकर बैठी हूँ। और अविनाश…अविनाश तो कहने को मेरा जीवनसाथी है। मेरा दु:ख-दर्द बाँटने की बजाय अक्सर रात को हैवान की तरह मुझ पर टूट पड़ता है। किसी से कुछ भी कह नहीं सकती।”               “माँ…माँ देखो न,मैंने जोकर का चित्र बना लिया।” रिया की आवाज से अनन्या की सोच भंग हो गई और चित्र देखकर हँसकर बोली,-“अरे वाह,  बहुत सुन्दर चित्र बनाया है। रुको,मैं थोड़ी देर में आकर जोकर पर पाँच लाइन बताती हूँ।”
       थोड़ी देर बाद अनन्या रिया को जोकर के बारे में बताने लगी और रिया लिखती गई,-“जोकर एक किरदार है।  वो अपना किरदार बखूबी निभाता है। वो अपने चेहरे पर रंग लगाकर असली चेहरा छिपाता है। अपने दु:ख-दर्द छिपाकर लोगों को हँसाता है। जो सब कर सकता है,असल में वही जोकर है।”
“वाह माँ,जोकर के बारे में आपको इतना कैसे पता!” रिया बोल उठती है। अनन्या हँसकर जवाब देती है,-“मैं तुम्हारी माँ हूँ न,इसलिए……।”
परिचय:श्रीमती वाणी बरठाकुर का जन्म-११ फरवरी और जन्म स्थान-तेजपुर(असम)है। इनका साहित्यिक उपनाम ‘विभा’ है।  वर्तमान में शहर तेजपुर(शोणितपुर,असम)में निवास है। स्थाई पता भी यही है। असम प्रदेश की विभा ने हिन्दी में स्नातकोत्तर,प्रवीण (हिंदी) और रत्न (चित्रकला)की शिक्षा पाई है। इनका कार्यक्षेत्र-शिक्षिका (तेजपुर) का है। श्रीमती बरठाकुर की लेखन विधा-लेख,लघुकथा,काव्य,बाल कहानी,साक्षात्कार एवं एकांकी आदि है। प्रकाशन में आपके खाते में किताब-वर्णिका(एकल काव्य संग्रह) और ‘मनर जयेइ जय’ आ चुकी है। साझा काव्य संग्रह में-वृन्दा,आतुर शब्द तथा पूर्वोत्तर की काव्य यात्रा आदि हैं। आपकी रचनाएँ कई पत्र-पत्रिकाओं में सक्रियता से छपती रहती हैं। सामाजिक-साहित्यिक कार्यक्रमों में इनकी  सक्रिय सहभागिता होती है। विशेष उपलब्धि-एकल प्रकाशन तथा बाल कहानी का असमिया अनुवाद है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-नूतन साहित्य कुञ्ज है। इनकी विशेषज्ञता चित्रकला में है। माँ सरस्वती की कृपा से आपको सारस्वत सम्मान (कलकत्ता),साहित्य त्रिवेणी(कोलकाता २०१६),सृजन सम्मान(पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी,तेजपुर २०१७), महाराज डाॅ.कृष्ण जैन स्मृति सम्मान (शिलांग),बृजमोहन सैनी सम्मान (२०१८) एवं सरस्वती सम्मान(दिल्ली) आदि मिल चुके हैं। एक संस्था की अध्यक्ष संस्थापिका भी हैं। आपकी रुचि-साहित्य सृजन,चित्रकारी,वस्त्र आकल्पन में है। आप सदस्य और पदाधिकारी के रुप में कई साहित्यिक संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-हिंदी द्वारा सम्पूर्ण भारतवर्ष एक हो तथा एक भाषा के लोग दूसरी भाषा-संस्कृति को जानें,पहचान बढ़े और इससे भारत के लोगों के बीच एकता बनाए रखना है। 

Hits: 11

आपकी प्रतिक्रिया दें.