झम्मन का विदाई भाषण

सुनील जैन `राही`
पालम गांव(नई दिल्ली)

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ये तो अनंत जीवन है। एक दिन आना है,कुर्सी पर बैठना है,कुर्सी तोड़ना है,कुर्सी छीनना,कुर्सी पटकना है,कुर्सी फेंकना है,कुर्सी के लिए लड़ना है,कुर्सी को छोड़ना है,कुर्सी के लिए शतरंज खेलना है।
कुर्सी आपकी प्रतिष्ठा है। कुर्सी से मान मिलता है। कुर्सी काम करने की प्रेरणा नहीं देती। कुर्सी पर बैठकर काम भी नहीं किया जाता। यह दीगर बात है कि,कुछ लोग कुर्सी पर बैठकर काम भी करते हैं,कर लेते हैं। कुर्सी दम्भ की निशानी है,कुर्सी पर लटका टावेल सम्मानित होने की निशानी है। कुर्सी के आगे मेज,मेज पर टेबलेट कैलेण्डर आपकी दोस्ती का प्रतीक है। कमरे में लगा चित्र आपके नतमस्तक होने वाली मानसिकता का प्रतीक है। और भी बहुत-सी चीजें जो आपको एक दिन छोड़कर जाना है। बाबूओं के सलाम से लेकर लेखाबाबू की कलम की कारगुजारियों के कारनामे तकl
आज झम्मन ने कुर्सी छोड़ दी। उन्होंने तो चाहा,मरते दम तक नहीं छोड़ेंगे,यह कोई आसाराम की सजा नहीं है। वैसे उनका कुर्सी छोड़ना,कुर्सी से अलग होना,उस छोटे कार्यालय की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इससे पहले भी कई झम्मन आए और मौसमी फल की तरह चले गए। झम्मन को मलाल था और उन्होंने तय कर रखा था,आखिर ये कार्यालय वाले आखिरी मौका तो बोलने का देंगे ही और दिया।
उन्होंने कहा-मुझे नहीं मालूम था,मैं इतना अच्छा हूं। मुझे यह भी नहीं मालूम था,मैं इतना नियमित हूं। खैर, आपने मेरे निकम्मेपन को बहुत सराहा। मेरी काम न करने की शैली को एक ऐसे आयाम तक पहुंचाया,जिसका अनुसरण आने वाली पीढ़ियां अवश्य करेंगी। यह सब आपका ही दिया हुआ है। मेरे बच्चों की शिक्षा में आपका योगदान, रमेश की लाई जाने वाली ताजी सब्जियों की तरह याद रहेगा। कार्यालय की गाड़ी हमेशा याद रहेगी,जिसकी वजह से मेरा बैंक जमा काफी मजबूती से `कामन वैल्थ गैम्स` में स्वर्ण पदकों की श्रृंखला बना सका। आपकी जिम्मेदा‍री ने मेरे सामाजिक जीवन में जो नई ऊंचाईयां प्रदान की हैं,उन्हें मेरा समाज कभी नहीं भूल पाएगा। जब भी समाज का कोई काम हुआ,आपने चंदा दिया,वह भण्डारा या जयंती हो या फिर धर्मशाला निर्माण कार्य में आपकी मदद से मेरी प्रतिष्ठा में चार चांद लगे। लोग मुझे दानी मानने लगे हैं।
मुझे यह कहते हुए बिलकुल खेद नहीं है कि,मैंने आपको जानबूझकर परेशान किया। जबसे कुर्सी पर बैठा,सब कुछ कार्यालय का और कार्यालय के लिए समर्पित रहा। मैं कार्यालय के लिए समर्पित रहा तो,खर्च भी कार्यालय से ही लूंगा और आपने दिया। यह भी सही है कि,सहीराम सही था, गलती मेरी थी,लेकिन मैंने निलंबित कर दिया। ऐसे कई कार्य हैं,जिनकी वजह से आपका कठोर मन मेरे लिए पिघला होगा। आपने मेरी शरीर पूजा का कई बार मन बनाया होगा, लेकिन मेरी लम्बी कानूनी लोगों से दोस्ती के कारण अपने- आपको निरीह पाया होगा। मेरे बनियों से आर्थिक संबंध और कार्यालय की महिलाओं के प्रति असंवेदनशील नज़र के नज़रिए को आप जानते ही हैं,उसकी व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है,वह मेरी विदाई में महिलाओं की उपस्थिति दिखा रही है।
अब अंत में और क्या कहूं। आप लोगों ने मुझे इतना प्यार दिया-स्नेह दिया,जिससे मेरा वजन ५० से १५० किलो हो गया। मेरी वजह से आपको हमेशा घर में,समाज में,कार्यालय में अपमानित होना पड़ा,इसका मुझे सुखद अहसास है। मुझे उम्मीद है मेरे जाने के बाद भी आप लोग मेरे लिए उसी श्रद्धा-आदर से अपशब्दों का इस्तेमाल करेंगे, जिन्हें वर्षों से वाशरूम की दीवारों पर पढ़ता आया हूं।
आपकी कल्पनाशक्ति का कायल हूं। आपने विश्व के जाने-माने पशुओं से तुलनात्मक अध्ययन कर शोध के लिए अनेक विषय प्रदान किए। मुझे में रात में जगने और बिना बात के कांव-कांव करने जैसी खूबियां होने की बात बताई।
आज से आप अपने शोध का विषय (मुखिया) बदलने जा रहे हैं। आपको बधाई हो,साथ ही आप मुझे समय-समय पर याद करते रहेंगे,इसलिए मैंने सभी सज्जनों के लिए एक जांच समिति का गठन कर दिया है और वह समय-समय पर मिलने वाली `आरटीआई` पूछताछ से याद आती रहेगी। मेरे कमरे की लाल बत्ती से मेरे सुकार्यों की याद ताजा बनी रहेगी। मेरे सबसे कनिष्ठ (नीच) सहयोगियों के सहयोग से मैंने बहुत से सराहनीय कार्य किए,जिससे श्रीमती—— आज तलाक की दहलीज पर खड़ी होकर मेरी आत्मा को चिरशांति प्रदान करने की गुहार रोज मंदिर में लगा रही हैं।
और भी अन्य कार्य हैं,जिनमें उल्लेखनीय है मैंने तुम्हें किसी त्योहार को मनाने लायक नहीं छोड़ा। भविष्य में भी आप न मना सकें,इसका भी चाक-चौबंद इंतजाम कर रखा है।
मेरे इतने कार्यों की आप उपेक्षा नहीं करेंगे और इस खुलासे के बाद शायद ही कोई बेशर्म होगा,जो मेरे जलपान पर रुपए खर्च करवाने की हिम्मत करेगा। इसीलिए,मैंने जलपान की व्यवस्था नहीं की है। आपका जीवन इसी प्रकार सुखद रहे,इसी बुरी कामना के साथ आपका शुभ-चिन्तक। समय-समय पर आपको मेरी याद `आरटीआई` से आती रहेगी।
मुझे ऐसा लगता है-अब जलपान की आवश्यकता नहीं है। अंत में वैधानिक चेतावनी-किसी व्यक्ति ने मुझे फेसबुक या व्हाट्सएप समूह पर प्रतिबंधित या अ-मित्र करने की हिम्मत दिखाई तो उसकी फाइल खुलवा दूंगा…।

परिचय-आपका जन्म स्थान पाढ़म(जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद)तथा जन्म तारीख २९ सितम्बर है।सुनील जैन का उपनाम `राही` है,और हिन्दी सहित मराठी,गुजराती(कार्यसाधक ज्ञान)भाषा भी जानते हैं।बी.कॉम.की शिक्षा खरगोन(मध्यप्रदेश)से तथा एम.ए.(हिन्दी,मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया है। पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन खाते में-व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी है।आपकी कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में लेखनी का प्रकाशन होने के साथ आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। राही ने बाबा साहेब आम्बेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया है। मराठी के दो धारावाहिकों सहित करीब १२ आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं,रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ४५ से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वविद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैं। कुछ अखबारों में नियमित व्यंग्य लेखन करते हैं। एक व्यंग्य संग्रह अभी प्रकाशनाधीन हैl नई दिल्ली प्रदेश के निवासी श्री जैन सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रीय है| व्यंग्य प्रमुख है,जबकि बाल कहानियां और कविताएं भी लिखते हैंl आप ब्लॉग पर भी लिखते हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य-पीड़ा देखना,महसूस करना और व्यक्त कर देना है।

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