टिमटिमाती बूंदें

वाणी बरठाकुर ‘विभा’
तेजपुर(असम)
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टिमटिमाती बूँदें रिमझिम बरसें,
सावन मेघा के झूले में झूले है 
आकर गिरने लगी जब धरती पर, 
चंचल मन वन में मयूर-सा नाचता है
कुछ बूँदें जब मेरी हथेली पर गिरी,
मोतियों-सी बिखरने लगी है…l 
 
 
छतरी का पंख लगाकर उड़ जाऊँ, 
बादलों की झमाझम में सरगम गाऊँ
मिट्टी की मतवाली महक में पुलकित मन,
सुहावन मखमली कोमल हरित वन 
प्यासी धरती को मिले जब मधु रस, 
सूखी धरती पर आ गया है पावस
आ री बदरी,बूँदों की मुस्कान ला,
उड़-उड़कर मेरे साजन का संदेशा लाl 
 
 
कब आएगा सजनवा मिलन खुशी का पल,
मिलनातुर मेरे चंचल नैन हुए हैं सजल 
देर न करना धरती ने भी पी लिया जाम,
तेरी राह तकना मेरे लिए नही है आसां काम
बूंदें नाचें जब मेरी हथेलियों पर, 
गाए हृदय तेरे लिए सुमधुर स्वरl 
 
 
खुशी से महकूं भीगे जब तन-बदन,
बारिश ने लगा दी है तन-मन में अगन
चंचल सरिता-सी बहने लगी है बूँदें,
खुशियों की कुछ फुहार मुझमें भी बहने दे
आया बारिश का मौसम सुहावन,
सबके घरों में खुशहाली है पावनll 
परिचय:श्रीमती वाणी बरठाकुर का जन्म-११ फरवरी और जन्म स्थान-तेजपुर(असम)है। इनका साहित्यिक उपनाम ‘विभा’ है।  वर्तमान में शहर तेजपुर(शोणितपुर,असम)में निवास है। स्थाई पता भी यही है। असम प्रदेश की विभा ने हिन्दी में स्नातकोत्तर,प्रवीण (हिंदी) और रत्न (चित्रकला)की शिक्षा पाई है। इनका कार्यक्षेत्र-शिक्षिका (तेजपुर) का है। श्रीमती बरठाकुर की लेखन विधा-लेख,लघुकथा,काव्य,बाल कहानी,साक्षात्कार एवं एकांकी आदि है। प्रकाशन में आपके खाते में किताब-वर्णिका(एकल काव्य संग्रह) और ‘मनर जयेइ जय’ आ चुकी है। साझा काव्य संग्रह में-वृन्दा,आतुर शब्द तथा पूर्वोत्तर की काव्य यात्रा आदि हैं। आपकी रचनाएँ कई पत्र-पत्रिकाओं में सक्रियता से छपती रहती हैं। सामाजिक-साहित्यिक कार्यक्रमों में इनकी  सक्रिय सहभागिता होती है। विशेष उपलब्धि-एकल प्रकाशन तथा बाल कहानी का असमिया अनुवाद है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-नूतन साहित्य कुञ्ज है। इनकी विशेषज्ञता चित्रकला में है। माँ सरस्वती की कृपा से आपको सारस्वत सम्मान (कलकत्ता),साहित्य त्रिवेणी(कोलकाता २०१६),सृजन सम्मान(पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी,तेजपुर २०१७), महाराज डाॅ.कृष्ण जैन स्मृति सम्मान (शिलांग),बृजमोहन सैनी सम्मान (२०१८) एवं सरस्वती सम्मान(दिल्ली) आदि मिल चुके हैं। एक संस्था की अध्यक्ष संस्थापिका भी हैं। आपकी रुचि-साहित्य सृजन,चित्रकारी,वस्त्र आकल्पन में है। आप सदस्य और पदाधिकारी के रुप में कई साहित्यिक संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-हिंदी द्वारा सम्पूर्ण भारतवर्ष एक हो तथा एक भाषा के लोग दूसरी भाषा-संस्कृति को जानें,पहचान बढ़े और इससे भारत के लोगों के बीच एकता बनाए रखना है। 

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