डोर बांध हाथों में

कौशल कुमार पाण्डेय ‘आस’ 
बीसलपुर (उत्तर प्रदेश)
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गुरु की आज्ञा पा राम उठे,
हाथों में धनवा को भींचा।
फिर डोर बांध हाथों में ले,
धनु की प्रत्यंचा को खींचाll
शर रखकर खींच नहीं पाए,
पर धनुष बंटा दो भागों में।
श्री राम सोचते रहे खड़े,
कर उलझ गया था धागों मेंll
सीता ने वरमाला लेकर,
राजीव-नयन को पहनाई।
नर-नारी प्रमुदित हुए देख,
घर-घर में खुशहाली छाईll
सम्पन्न विवाह हो भी न सका,
भगवान परशुधर आ बोले।
श्री परशुराम की बातें सुन,
श्री लखनलाल जी थे डोलेll

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