तनहाईयों से बातें

पुष्पा अवस्थी ‘स्वाति’ 
मुंम्बई(महाराष्ट्र)

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तनहाईयो में बैठ के,बातें करो कभी।
ख़लवत में खुद से भी,मुलाकातें करो कभी।

देखो तो कभी गौर से,कितनी हैं खामियां,
इनको मिटाने की,करामातें करो कभी।

बेख़्वाब आँखों में गुजारी,कितनी शबे ग़म,
औरों के दर्द में भी,जगराते करो कभी।

बेजान,हसरतों को लिये,भागते रहे,
अब रुह से मिलन की,बरातें करो कभी।

कितने बहाये अश्क हैं `स्वाति` कहां-कहां,
उनके कदम धो दें वो,बरसातें करो कभीll

परिचय–पुष्पा अवस्थी का उपनाम-स्वाति है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी साहित्य रत्न)है। जन्म स्थान-कानपुर है। आपका कार्यक्षेत्र स्वयं का  व्यवसाय(स्वास्थ्य सम्बंधी)है। वर्तमान में पुष्पा अवस्थी मुंम्बई स्थित कांदिवली(वेस्ट)में बसी हुई हैं। इनकी उपलब्धि बीमा क्षेत्र में लगातार तीन साल विजेता रहना है। प्रकाशित पुस्तकों में-भूली बिसरी यादें(ग़ज़ल-गीत कविता संग्रह)एवं तपती दोपहर के साए (ग़ज़ल संग्रह)है।

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