तितली आज भी आती है

पवन कुमार वैष्णव
उदयपुर(राजस्थान)

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आज भी तितली फूलों पर मंडराती
दिख जाती है,
बाग़ को इसी बात का है सन्तोष कि
तितली आती है आज भी फूलों के पास।

कई दिनों से,
गलियों में,चौबारे में
बच्चे नहीं खेले,
गुड़िया पड़ी उदास।

सब्जी वाली आई नहीं,
जाने कितने दिन बीते
खा-खाकर मटर-पनीर,
कल कोई बोल रहा था
उसके छोटे से खेत की हो गई नीलामी,
वहा खुल गई पनीर बनाने वाली फैक्ट्री।

सर बहुत दुखता है मिन्नी का,
बेटे की आँखों पर नम्बर वाला चश्मा लग गया है
पत्नी का दर्द कमर का,ज्यों का त्यों है,
घर पूरा दवाईयों से महकता दिनभर
जबसे आए गाँव से शहर में,
जबसे पत्नी ने माँ को वापिस गाँव भिजवाया
जबसे तुलसी का पौधा सूख गया,
सीमेंट के गमले में।

फिर भी तितली आती आज भी
फूलों के पास…ll

परिचय-पवन कुमार वैष्णव की जन्म तारीख २५ दिसम्बर १९८७ तथा जन्म स्थान-चिकारड़ा,चित्तोड़गढ़(राजस्थान) हैl वर्तमान में उदयपुर(राजस्थान) के बड़गाँव में रहते हैं,जबकि स्थाई पता चिकारड़ा ही हैl आपकी शिक्षा स्नातकोत्तर (हिंदी साहित्य),शिक्षा स्नातक तथा `नेट` हैl कार्यक्षेत्र में हिंदी व्याख्याता(उदयपुर)हैंl श्री वैष्णव की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल एवं कहानी लेखन है,पर मुख्य रूप से कविता लेखन करते हैंl सृजन गुच्छ-३(सामूहिक काव्य संग्रह) प्रकाशित हो चुका है, तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आलेख,पत्र तथा कविताएँ प्रकाशित हैंl फिलहाल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए हैंl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा से अत्यधिक लगाव होने से साहित्य पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। इसी कारण लिखने की आदत बन गई है,अब सामाजिक दायित्व तथा स्वान्त सुखाय के कारण लिखते हैं। लेखन धर्म है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-जयशंकर प्रसाद,प्रेमचन्द,दिनकर,बच्चन,नीरज,रामदरश मिश्र,डॉ.विष्णु सक्सेना एवं हरिओम पंवार का साहित्य है। इनकी विशेषज्ञता-मंच सञ्चालन-काव्य पाठ में हैl

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