तुम्हारा सौंदर्य

नवल पाल प्रभाकर
झज्जर(हरियाणा)
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तेरी आँखें
तेरा चेहरा,
उतर गया
सीने अंदर,
तोड़  कर
सारा पहरा,
चेहरे पर
मद भरी
नशीली आँखें,
नुकीली नाक
लाल कमल,
पंखुरी से होंठ,
शरारती हवा
बार-बार,
टकरा कर
छेड़ती तेरी
जुल्फों को,
काली लट भी
इधर-उधर
लहरा कर,
बिखरती हुई
चेहरे पर,
और सुन्दरता
बढ़ा देती है।
गोरे चेहरे को
और गोरा,
बना देती है।
पूरा शरीर
ढला हुआ,
किसी तराशी
मूर्ति-सा,
हर जगह
अलग-अलग,
हर अंग
अपनी जगह
शोभायमान
हो रहा,
हाथों का
अपनी जगह,
अपना अलग
महत्व है।
टांगें भी
खिली-खिली,
हरे कपड़ों
से ढकी,
अपना महत्व
जता रही हैं,
आगे-पीछे
बढ़कर ये
उन्हें ओर
लहरा रही हैं,
वाकई तुम
क्या हो,
क्या इन्द्र की
हूर हो,
या फिर
आसमां से
उतरी हुई,
तुम कोई
परी हो॥
परिचय : विविध लेखन के अनुभवी नवल पाल प्रभाकर का निवास  हरियाणा राज्य के जिला झज्जर में है। साहित्यिक उपनाम ‘दिनकर’ है। आपकी  शिक्षा एम.ए.(हिन्दी) व बी.एड.है। आप हिन्दी सहित अंग्रेजी,उर्दू भाषा का भी ज्ञान रखते हैं। हैं। श्री पाल की प्रकाशित पुस्तकों में मुख्य रुप से यादें, उजला सवेरा, नारी की व्यथा (तीनों काव्य संग्रह),कुमुदिनी और वतन की ओर वापसी (दोनों कहानी संग्रह)आदि हैं। साथ ही ऑनलाईन पुस्तकें (हिन्दी का छायावादी युगीन काव्य, गौतम की कथा आदि)भी प्रक्रिया में हैं। कई भारतीय समाचार पत्रों के साथ ही विदेशी पत्रिकाओं में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। सम्मान व पुरस्कार के रुप में प्रज्ञा साहित्य मंच(रोहतक), हिन्दी अकादमी (दिल्ली) तथा अन्य मंचों द्वारा भी आप सम्मानित हुए हैं। श्री प्रभाकर की जन्मतिथि-३ जनवरी १९८५ एवं जन्म स्थान-साल्हावास शहर है। आपका स्थाई पता भी साल्हावास (राज्य-हरियाणा)ही है। आपकी लेखनी का उद्देश्य हिन्दी लेखन में नवोदित प्रतिभाओं को पल्लवित-पुष्पित करना है। आप ऑनलाइन साहित्यिक मंचों  में भी सक्रिय होकर नवोदितों को सहयोग करते हैं। 

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