तुम्हारे नाम लिख दूँ मैं.. 

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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कहो तो जिन्दगी अपनी,तुम्हारे नाम लिख दूँ मैं।
जमाने की सभी खुशियाँ,तुम्हारे नाम लिख दूँ मैं॥

चले आओ हमारे पास में,सब छोड़कर अपनी,
तुम्हारी चाहतों में जिन्दगी,बदनाम लिख दूँ मैं।

मिटा सकता नहीं कोई,हमारे यार की यारी,
सनम तेरे लिए ही आज,चर्चा आम लिख दूँ मैं।

दिखा दो आज दुनिया को,हमारी जान तुम ही हो,
कसम से चाह में तेरी,सुबह को शाम लिख दूँ मैं।

न जाने आपकी नजरें,कहाँ से रंग लाई है,
दिले नादान हूँ ‘बोधन’,नजर को जाम लिख दूँ मैं॥

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