तूफान..

मनोरमा रतले
दमोह (मध्यप्रदेश)
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कहते हैं न एक ही बात
काफी है जिंदगी में
तूफान लाने के लिए…
सच कुछ बातें…
जब सहन से…,
बाहर हो जाती हैं…
तब वो…
कुछ तूफान सा मचाती हैं…।
बताओ तो…,
जो कल तक…
माँ-माँ…
कहते न थकता था…,
वो आज लिख रहा…
‘वाइफ इज लाइफ…’
बताओ….,
तो…फिर…
हम तो सोचते थे…
कि हमारी जिंदगी तुम…,
पर तुम्हारी वो…
कैसे…सहज हो
वो कह गया है…,
और हम रोते रहे…
कि काश…,
वहाँ कुछ और लिखा होता…।
तभी हम…
फिर संभले,
और खुद से कहा…,
जरूरी नहीं कि…
हम जिसे जितना चाहें…
वो भी हमें उतना ही चाहे…।
किस्मत है…
ये तो वो रब ही जाने…,
हमने सब समझते हुए…
इन आँसूओं को पोंछा…
और झंझावतों को दिल में समेट..
कुछ वादा लिया…
आज खुद से…,
मत करो अपेक्षा…
वर्ना…यूं ही रोते रहोगे…।
कल तुम थी जहाँ…,
आज वहां कोई और है…
और कल फिर….
कोई होगा…॥
परिचय-मनोरमा रतले का निवास दमोह स्थित टंडन बगीचा के पास में है। आपकी जन्मतिथि १७ मार्च १९७६ और जन्म स्थान-कटनी(मध्यप्रदेश)है। अर्थशास्त्र में एम.ए. की शिक्षा प्राप्त श्रीमती रतले का कार्यक्षेत्र-समाजसेवा है। आप सामाजिक क्षेत्र में सेवा के लिए दमोह में कुछ समितियों से सदस्य के रुप में जुड़ी हुई हैं,तो कुछ की अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष भी रहीं हैं। लेखन विधा-कविता,लेख,लघुकथा तथा मुक्त गीत है। लेखनी के लिए आप हिन्दी लेखिका संघ(दमोह) से साहित्य श्री सम्मान, छत्तीसगढ़ से महिमा साहित्य भूषण सम्मान,छत्तीसगढ़ से `प्रेरणा साहित्य रत्न` सम्मान सहित भोपाल से शब्द शक्ति सम्मान एवं `आयरन लेडी ऑफ दमोह` से भी सम्मानित हैं। विविध पत्रों में आपकी रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-शौक,समाज के लिए कुछ करना और विचारों की क्रांति लाना है। एक किताब प्रकाशन की प्रक्रिया में है। आपकी विशेष उपलब्धि आकाशवाणी में काव्य पाठ करना है।

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