तेरे लिए

सुमिधा सिदार`हेम`
सरकण्डा(छत्तीसगढ़)
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जिन्दगी का हर सफर,
आज छोटा लगने लगा है।
दोनों मिल थामे थे हाथ,
आज मजबूत होने लगे हैं।
कड़वे-मीठे स्वाद
मिलकर चखे हैं।
मेरे हर सपने को,
कर लिया तूने अपने नाम
आज मैं खुले आसमां में उड़ने लगी हूँ।
तेरे हौंसले से पैर में जंजीर खोल,
सीढ़ी-ए-मंजिल ढूंढने लगी हूँ।
चाहत थी दो कदम चलने की,
तेरे को पाकर सैकड़ों दूर चली हूँ
ओझल न होना मेरी आंखों से,
कभी तेरे लिए दुनिया सजाने लगी हूँ॥
परिचय-१३ सितम्बर १९९० को जन्मीं सुमिधा सिदार का जन्म स्थान-ग्राम कुण्डापाली(छग) है। आप वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में महासमुंद जिले के ग्राम-सरकण्डा में रहती हैं। श्रीमती सिदार का साहित्यिक उपनाम-हेम(पति का नाम और वही आदर्श)है। शिक्षा-बी.ए. और कार्यक्षेत्र-सरकण्डा ही है।आप सामाजिक क्षेत्र में लोगों को बेटी की महत्ता बताने के साथ ही तनाव से राहत के लिए हँसाने की कोशिश करती हैं। लेखन में कविता, कहानी, एकांकी, हाइकु, तांका, मुक्तक एवं शायरी रचती हैं। आपकी नजर में-मेरी लिखी रचना कोई दूसरा पढ़ता है,वही सम्मान है। आपके लेखन का उद्देश्य-समाज की औरतों के प्रति है,क्योंकि गोंडवाना समाज को निखारना है,ताकि महिला वर्ग घर,गली, गाँव से बाहर निकलकर समाज के बारे में सोंचने को तैयार करना,औरतों को जागृत करना व हिन्दी भाषा लेखन को बढ़ावा देना है। कार्यक्षेत्र में आप गृहिणी हैं और ब्लॉग पर भी लिखती हैंl कुछ वेब मंचों पर आपकी रचना का प्रकाशन हुआ है।

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