दरिया पार कैसे हो

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली
भोपाल(मध्यप्रदेश)
*********************************************************************************************
कोई माझी बिना कश्ती वो दरिया पार कैसे हो।
समंदर से अगर यारी तो राहें ख़ार कैसे हो।

बवंडर ने कहा माझी से है अपनी निज़ामत ये,
मगर जो चाहिए ज़न्नत तो ये आसार कैसे हो।

बिना तक़दीर के बूते चले कोई जमाने में,
ख़ुदा की ना इनायत हो तो लम्बरदार कैसे हो।

अगर है आज़माना चाँद सूरज औ सितारों को,
उगाए बिन नया सूरज बरख़ुर्दार कैसे हो।

कभी जो अश्क हो पोंछा किसी का तो बताओ तुम,
सुकूँने लफ्ज़ ना बोला तो कोई यार कैसे हो।

लगी है शर्त भी अपनी ख़ुदा बनकर दिखाओ ‘ध्रुव’,
दुआयें गर नहीं माँ की तो ये संसार कैसे हो॥

परिचय–प्रदीपमणि तिवारी का लेखन में उपनाम `ध्रुव भोपाली` हैl आपका कर्मस्थल और निवास भोपाल (मध्यप्रदेश)हैl आजीविका के लिए आप भोपाल स्थित मंत्रालय में सहायक के रुप में कार्यरत हैंl लेखन में सब रस के कवि-शायर-लेखक होकर हास्य व व्यंग्य पर कलम अधिक चलाते हैंl इनकी ४ पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैंl गत वर्षों में आपने अनेक अंतर्राज्यीय साहित्यिक यात्राएँ की हैं। म.प्र.व अन्य राज्य की संस्थाओं द्वारा आपको अनेक मानद सम्मान दिए जा चुके हैं। बाल साहित्यकार एवं साहित्य के क्षेत्र में चर्चित तथा आकाशवाणी व दूरदर्शन केन्द्र भोपाल से अनुबंधित कलाकार श्री तिवारी गत १२ वर्ष से एक साहित्यिक संस्था का संचालन कर रहे हैं। आप पत्र-पत्रिका के संपादन में रत होकर प्रखर मंच संचालक भी हैं।

Hits: 3

आपकी प्रतिक्रिया दें.