दर्पण

केवरा यदु ‘मीरा’ 
राजिम(छत्तीसगढ़)
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अँखियों के दर्पण में समाये
साजन की मुस्कान रे।
साँसों की हर तार पे मेरी
है प्रियतम का नाम रे।

मुस्कुरा के साजन
जब मेरी ओर निहारे।
शरमाऊँ मै छुई-मुई-सी
मर जाऊँ लाज के मारे।
मुखड़ा छुपा लूं आँचल से
ज्यों घिर आई शाम रे।
अँखियों  के दर्पण में…

कहते हैं सजना मेरे
हरपल तुम हँसती ही रहो।
सारे गम दे दो मुझको
सारी खुशियाँ तुम ले लो।

नेह को तेरे प्रियतम मेरे
मेरा नम्र प्रणाम रे।
अँखियों के दर्पण में…

सजती हूँ सजना के लिये
मैं पहन चुनरिया लाली।
कजरा-गजरा लगा के महकूं
पहन कान में बाली।
कँगना चूड़ी खनक के बोले
प्यारे पिया का नाम रे॥
अँखियों के दर्पण में…

स्वर्ग से प्यारी प्रीत पिया की
प्यारी बतिया बोले।
रब के करम हैं साजन मेरे
हरपल संग-संग डोले।
जब-जब जनम मिले प्रियवर का
हाथ रहे मेरे हाथ रे॥
अँखियों के दर्पण में…

प्रीत का रंग न फीका हो
मेंहदी हाथों में रची रहे।
जब तक सूरज चंदा हो जग में
माँग सिंदूर से सजी रहे।
बिंदिया में भी रहे चमकता
साजन तेरा नाम रे॥

अँखियों के दर्पण में समाये
साजन की मुस्कान रे।
साँसों की हर तार पे मेरी
है प्रियतम का नाम रे॥

परिचय-केवरा यदु का साहित्यिक उपनाम ‘मीरा’ है। इनकी जन्म तारीख २५ अगस्त १९५४ तथा जन्म स्थान-ग्राम पोखरा(राजिम)है। आपका स्थाई और वर्तमान बसेरा राजिम(राज्य-छत्तीसगढ़) में ही है। स्थानीय स्तर पर विद्यालय के अभाव में आपने बहुत कम शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र में खुद का व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के तहत महिलाओं को हिंसा से बचाना एवं गरीबों की मदद करना प्रमुख कार्य है। भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए ‘मितानिन’ कार्यक्रम से जुड़ी हैं। आपकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल सहित भजन है। १९९७ में श्री राजीवलोचन भजनांजली,  २०१५ में काव्य संग्रह-‘सुन ले जिया के मोर बात’,२०१६ में देवी भजन (छत्तीसगढ़ी में)सहित २०१७ में सत्ती  चालीसा का भी प्रकाशन हो चुका है। लेखनी के वास्ते आपने सूरज कुंवर देवी सम्मान,राजिम कुंभ में सम्मान,त्रिवेणी संगम साहित्य सम्मान सहित भ्रूण हत्या बचाव पर सम्मान एवं हाइकु विधा पर भी सम्मान प्राप्त किया है। केवरा यदु के लेखन का उद्देश्य-नारियों में जागरूकता लाना और बेटियों को प्रोत्साहित करना है। इनके जीवन में प्रेरणा पुंज आचार्यश्रीराम शर्मा (शांतिकुंज,हरिद्वार) व जीवनसाथी हुबलाल यदु हैं। 

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