दर्शनीय स्थल:जतमाई धाम

वीरेन्द्र कुमार साहू
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण प्रदेश है। यहाँ की हरी-भरी वादियाँ लोगों को बरबस ही मोहित कर लेती हैं। पर्वत,पठार,नदियाँ व जंगल की विदयमानता इनकी शोभा में चार चाँद लगाती है। सुंदर वादियों के बीच में पर्यटन स्थल,धार्मिक स्थल व अभ्यारण्य लोगों को यहाँ बार-बार आने के लिए आतुर करता है। ऐसा ही एक दर्शनीय स्थल है-जतमाई धाम।
जी हाँ! जतमाई धाम,जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग ७५ किमी की दूरी पर गरियाबंद जिले की मनोरम वादियों के बीच अवस्थित प्राकृतिक व धार्मिक महत्व का स्थल है। पहाड़ों को लाँघता हुआ सर्पाकार,घुमावदार पहुँच मार्ग जहाँ भ्रमण का अनोखा आनंद प्रदान करता है,वहीं चिड़ियों की चहचहाहट जंगलों के बीच में निर्वेद संगीत का एहसास कराती है। हिरण, नीलगाय जैसे जंगली जीवों से साक्षात्कार जीवन में एक नया अनुभव प्रदान करता है। सकल मनोरथ पूरणीय माता जतमाई का निवास झरझर झरते ७०-७५ फुट के जलप्रपात के मध्य में एक गुफानुमा स्थान में है,जो लौकिक होकर अलौकिकता का अनुभव कराता है।
पहाड़ों के ऊपर से बहकर आती जलधाराएं माँ की महिमा गाने मानो दौड़ीं चली आ रही हैं,ऐसा प्रतीत होता है। माता जी के दर्शन करके नीचे उतरते हैं तो एक मनमोहक कुंड में स्नान का अद्भुत आनंद भी ले सकते हैं। कुंड से बहती जलधाराओं के साथ हम २००- ३०० मीटर आगे बढ़ते हैं तो माँ भवानी जतमाई की सवारी सिंह के प्राकृतिक आवास ‘सिंहगुफा’ के भी दर्शन पा सकते हैं।

माता जतमाई आदिशक्ति माता का ही एक रूप है। यहाँ वर्ष में दो बार चैत्र नवरात्रि व शारदीय नवरात्रि में विशाल मेला लगता है। प्रदेश ही नहीं,बल्कि देश-विदेश से भी यहाँ दर्शनार्थी आते हैं,तथा मनोकामना पूर्ति के लिए ज्योति कलश भी जलाते हैं। प्राकृतिक-सौंदर्य दर्शन के साथ में देवी-कृपा को प्राप्त करने की आशा से प्रतिदिन हजारों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। माता जी के धाम से ठीक २-३ किमी पहले एक विशाल जलाशय है, जिसे तौरेंगा बाँध के नाम जाना जाता है। लोग यहाँ पर पिकनिक मनाने के उद्देश्य से आते हैं। नौका-विहार करके जलाशय भ्रमण का लुत्फ़ भी उठाते हैं।
माता जतमाई के धाम से आगे बढ़ें २-३ किमी की दूरी पर प्रकृति की गोद में बसा एक और दर्शनीय स्थल घटारानी धाम है,जहाँ की शोभा अद्वितीय है। कलकल बहते झरने,ऊँचे-ऊँचे पेड़-पौधे,कलरव करती खग श्रेणी,उछलते-कूदते बंदर आनंद की अनुभूति कराते हैं। जतमाई धाम पहुँचने के लिए रायपुर से अभनपुर राजिम होते हुए,रायपुर गरियाबंद मुख्यमार्ग में पाण्डुका नामक छोटे से कस्बे में चारोंधाम चौक से पूर्व दिशा की ओर ११-१२ किमी की यात्रा में रजनकटा,अतरमरा,कुम्हरमरा नामक ग्रामों से होते हुए तौरेंगा जलाशय एवं माता जतमाई के दरबार पहुंचते हैं।
ऋषि-मुनियों के निवास-स्थान कैसे थे,जंगलों में आनंद की अनुभूति कैसी होती होगी ?,तथा जंगली जीवों से साक्षात्कार का रोमांचक अनुभव करना चाहते हैं व पर्वत,पठार,झरने,जंगल, जलाशय एवं माता जी का दर्शन लाभ एकसाथ लेना चाहते हैं तो जरूर आइए। विविधताओं के गढ़,छत्तीसगढ़ की इन मनोरम वादियों में हर आगंतुक का स्वागत है।
परिचय-वीरेन्द्र कुमार साहू का जन्म १५ दिसम्बर १९८७ को बोड़राबांधा (राजिम) में हुआ हैl आपका वर्तमान निवास ग्राम-बोड़राबांधा,पोड़(पाण्डुका),जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़)हैl यही स्थाई निवास भी हैl छत्तीसगढ़ राज्य के श्री साहू ने एम.ए.(हिन्दी) और डी.पी.ई. की शिक्षा प्राप्त की हैl आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत स्वयं के समाज में सेवी हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,कविता हैl ब्लॉग पर भी सक्रिय लेखन करते हैंl वीरेंद्र साहू की लेखनी का उद्देश्य-भावों की अभिव्यक्ति से नवजागरण करना हैl  

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